नई दिल्ली. राफेल डील को लेकर बीजेपी-कांग्रेस को लेकर रार थमने का नाम नहीं ले रही है. एक तरफ कांग्रेस इस डील में बीजेपी पर करप्शन के आरोप लगा रही है. वहीं दूसरी ओर बीजेपी कह रही है कि वह यूपीए के मुकाबले सस्ते में राफेल लड़ाकू विमान खरीद रही है. आइए आपको बताते हैं कि आखिर फ्रांस से करीब 58000 करोड़ में खरीदे जाने वाले 36 राफेल विमान की इस डील में कब क्या हुआ.

क्या है राफेल: फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित दो इंजनों वाला राफेल दुनिया के सबसे खतरनाक लड़ाकू विमानों में से एक है.

क्या है यूपीए डील?
126 मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए भारत ने 2007 में तत्कालीन कांग्रेस नेता एके एंटनी की अगुआई में वायुसेना के प्रस्ताव को मंजूरी दी. इस डील के लिए लॉकहीड मार्टिन (एफ-16), यूरोफाइटर टायफून, रूस (मिग-35) स्वीडन की ग्रिपेन, बोइंग (एफ/ए-18) और डसॉल्ट एविएशन (राफेल) जैसे दावेदार थे. लंबी प्रक्रिया के बाद दिसंबर 2012 में डसॉल्ट एविएशन ने सबसे कम बोली लगाई. असल प्रस्ताव में 18 विमानों का निर्माण फ्रांस में और 108 विमानों को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की मदद से भारत में किया जाना था. राफेल डील पर जो भी मोलभाव हुआ, उसका एेलान नहीं किया गया. लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने कहा कि डील करीब 10.2 बिलियन डॉलर की है. कांग्रेस का दावा था कि एवियोनिक्स और हथियारों के अलावा प्रति लड़ाकू विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये है.

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 नरेंद्र मोदी सरकार ने क्या डील फाइनल की: फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल 2015 को बताया कि भारत फ्रांस से सरकार से सरकार समझौते के तहत 36 लड़ाकू विमान खरीदेगा. एेलान के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए कि पीएम नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा की कैबिनेट कमिटी की मंजूरी के बिना डील फाइनल कैसे कर दी. सरकार ने कहा कि विमान, संबंधित सिस्टम और हथियार उसी कॉन्फिगरेशन के दिए जाएंगे, जिन्हें वायुसेना ने मंजूर और टेस्ट किया है.

क्या है अंतिम डील: भारत और फ्रांस ने 36 राफेल विमानों के लिए 23 सितंबर 2016 करीब 59000 करोड़ की डील पर दस्तखत किए. इन विमानों की डिलीवरी सितंबर 2019 से शुरू होगी. यूपीए सरकार के तहत खरीद प्रक्रिया के आधार पर ही इस डील को अंतिम रूप दिया गया.

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क्या हैं कांग्रेस के आरोप: कांग्रेस का कहना है कि इस डील में बेहिसाब गड़बड़ियां हुई हैं और मोदी सरकार एक विमान 1,670 करोड़ रुपये में खरीद रही है, जबकि यूपीए सरकार की डील में एक विमान 526 करोड़ में खरीदा जाना था. कांग्रेस ने सरकार से यह भी पूछा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को इस डील में शामिल क्यों नहीं किया. कांग्रेस ने पूछा कि प्रति विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,670 करोड़ कैसे हो गई. हालांकि नरेंद्र मोदी सरकार ने भारत-फ्रांस के बीच 2008 में हुए गुप्त समझौते का हवाला दिया.

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि इस डील के जरिए वह रिलायंस डिफेंस को फायदा पहुंचा रही है और कंपनी ने डसॉल्ट एविएशन के साथ एक संयुक्त उपक्रम भी बनाया है. कांग्रेस का आरोप है कि 10 अप्रैल 2015 को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा राफेल डील के एेलान से 12 दिन पहले ही रिलायंस डिफेंस का निर्माण किया है. हालांकि रिलायंस डिफेंस ने इन आरोपों को गलत ठहराया है.

राफेल सौदे पर नरेंद्र मोदी सरकार की सफाई: 2 साल पहले रक्षा राज्य मंत्री ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा कि एक राफेल विमान की कीमत करीब 670 करोड़ रुपये है, लेकिन उन्होंने उसके उपकरण, हथियारों और सर्विसेज की जानकारी नहीं दी. बाद में सरकार ने इसकी कीमतों के बारे में बात करने से इनकार कर दिया. सरकार ने कहा कि 36 लड़ाकू विमानों की कीमतों और 126 विमानों के असली प्रस्ताव की तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि ”आपूर्ति” अलग है. वहीं बुधवार (29 अगस्त) को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक फेसबुक पोस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर डील को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जो डील नरेंद्र मोदी सरकार ने फाइनल की है, वह 2007 में यूपीए काल की डील से कहीं बेहतर है.

बीजेपी ने यह दी सफाई: राफेल सौदे पर राहुल गांधी ने संयुक्त संसदीय कमिटी (जेपीसी) के गठन की मांग उठाई तो बीजेपी चीफ अमित शाह ने कांग्रेस को झूठी पार्टी बताया. राहुल के ट्वीट पर शाह ने कहा, 24 घंटे तक प्रतीक्षा क्यों करें जब आपके पास पहले से ही आपकी JPC- झूठी पार्टी कांग्रेस है। देश को मूर्ख बनाने के लिए आपके झूठ स्पष्ट हैं। राफेल की कीमत आप के द्वारा दिल्ली, कर्नाटक, रायपुर, हैदराबाद, जयपुर और संसद में भिन्न होती है। लेकिन देश का आईक्यू आपकी तुलना में अधिक है. वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राफेल सौदे के आरोप किंडरगार्टन या प्राइमरी स्कूल के बच्चों जैसी बहस है. इससे दिखता है कि राहुल गांधी को कितनी समझ है. उन्होंने कहा कि रक्षा सौदों में कांग्रेस के हाथ पहले से ही गंदे हैं और उन्होंने राफेल डील को ठंडे बस्ते में डाले रखा.

अनिल अंबानी ने की सफाई: राफेल सौदे पर रिलायंस डिफेंस के मालिक अनिल अंबानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों को आधारहीन और दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि सच्चाई की जीत होगी. उन्होंने कहा कि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह दुर्भाग्यपूर्ण, निहित स्वार्थ और कंपनी प्रतिद्वंदिता से प्रेरित है.

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