अहमदाबाद. गुजरात विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी के विज्ञापन में पप्पू शब्द पर रोक लगा दी है आयोग ने इसे अपमानजनक बताया. बीजेपी इस नाम के जरिए कांग्रेस उपाध्यक्ष पर निशाना साधती रही है साथ ही सोशल मीडिया पर राहुल पर फब्ती कसने के लिए पप्पू शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पिछले महीने पार्टी द्वारा सौंपी गई प्रचार सामग्री में इस शब्द पर आपत्ति जताई है. हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने सफाई में कहा है कि विज्ञापन में किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया गया.

विज्ञापनों की स्क्रिप्ट बीजेपी मे पिछले महीने चुनाव आयोग के सामने मंजूरी के लिए दाखिल की थी, गुजरात मुख्य चुनाव आयुक्त के तहत बनी मीडिया समिति ने विज्ञापनों की स्क्रिप्ट में जब पप्पू शब्द देखा तो आपत्ति व्यक्त की. गुजराती भाषा में पप्पू का मतलब बेशर्म होता है. आयोग ने कहा कि राजनीतिक विज्ञापन में पप्पू शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, चुनाव आयोग इसे बदलने की सिफारिश करती है. पप्पू शब्द को प्रतिबंधित करते हुए ऐसे भ्रामक विज्ञापन पर तत्काल रोक लगाने की घोषणा की है. बीजेपी नेता का कहना है कि स्क्रिप्ट में पप्पू को किसी व्यक्ति से सीधे नहीं जोड़ा गया था. हमने समिति के समक्ष फिर से विचार करने की अपील की, लेकिन अपील को खारिज कर दिया. इसलिए हम इसमें बदलाव कर फिर से मंजूरी के लिए भेजेंगे. हालांकि गुजरात के सीईओ बीबी स्वैन का कहना है कि उन्हें इस तरह के किसी घटनाक्रम की फिलहाल जानकारी नहीं है.

गुजरात में नौ दिसंबर और 14 दिसंबर को मतदान होना है. नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे. राज्य में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है. गुजरात में कुल 182 विधान सभा सीटें हैं. बहुमत के लिए 92 सीटें चाहिए. ऐसे में पार्टियां चुनाव जीतने के लिए कोई भी हथकंडे अपनाने से पीछे नहीं हट रही हैं.

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