नई दिल्ली. भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था लेकिन अब देश बेरोजगारी और आर्थिक मंदी से जूझ रहा है. ये हम नहीं कह रहे ये जानकारी हाल ही में आई जीडीपी दर की रिपोर्ट बता रही है जो कि 6 साल की सबसे बड़ी गिरावट है. हाल ही में आई इस रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 3 महीने में जीडीपी की दर में 0.5 फीसदी की गिरावट आई और दूसरी तिमाही में जीडीपी का आंकड़ा 4.5 फीसदी पहुंच गया है. साल 2019-20 की चालू वित्त वर्ष में पहली तिमाही की जीडीपी की दर 5 फीसदी थी लेकिन अब तीन महीने बाद दूसरी तिमाही में यह दर 4.5 हो गई है.

देश की अर्थव्यवस्था एक तरह से दिन व दिन ढहती जा रही है क्योंकि की जीडीपी दर दिन व दिन गिर रही है. ऐसा कहा जाता है कि अगर आपको किसी देश की आर्थिक व्यवस्था मापनी है तो आप जीडीपी के आंकड़े देखें. क्योंकि किसी देश के भविष्य में अर्थव्यवस्था को जीडीपी के आंकड़े ही तय करते हैं. सरकारी संस्‍था केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) जीडीपी के आंकड़ो को अलग-अलग मंत्रालय से जुटाता है. सीएसओ द्वारा जुटाए गए आंकड़ों को ही आधिकारिक माना जाता है.

साल 2013 मार्च में जीडीपी दर 4.3 थी इसके बाद अब ये दर भारत में देखने को मिली है. मोदी सरकार में पहली तिमाही की जीडीपी दर के बाद ही देश काफी निराश था अब लोग ये भी कह रहे हैं कि यही हाल रहा तो देश की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह से फ्लॉप हो जाएगी.

 हाल ही की तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि तेजी से फिसल रही है, जिससे सरकार को आर्थिक विस्तार को बढ़ावा देने के लिए एक मेगा कॉर्पोरेट कर कटौती सहित कई उपायों की घोषणा करने का संकेत मिला है. पिछली मोदी सरकार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट थी. UPA-II के दौरान मार्च 2009 में ब्रेंट क्रूड की कीमतें मार्च 2009 में लगभग $50 प्रति बैरल से बढ़कर $128 प्रति बैरल हुई थीं. जो मार्च 2014 में लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं.

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