नई दिल्ली. आर्थिक मंदी के इस दौर में भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की विकास दर गिर गई है. साल 2019-20 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी दर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है. जीडीपी का यह आंकड़ा पिछले 6 साल में सबसे कम है. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने आधिकारिक रूप से यह आंकड़ा जारी किया है. केंद्र सरकार ने बताया है कि अक्टूबर महीने में देश के करीब 8 प्रमुख उद्योगों का उत्पादन 5.8 प्रतिशत तक गिरा है.

भारत सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़े में बताया गया कि सितंबर 2019 तिमाही में देश की जीडीपी 4.5 प्रतिशत रही है. जबकि पिछली तिमाही में यह दर 5 फीसदी थी. यानी कि एक तिमाही में देश की जीडीपी 0.5 फीसदी गिर गई. इससे पहले 2013 में देश की जीडीपी इतनी कम थी. यानी कि 7 साल में पहली बार देश की जीडीपी की दर इतनी कम स्तर पर पहुंची है.

केंद्र सरकार के यह आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं. इससे साफ जाहिर है कि भारत वर्तमान में आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है. उद्योगों के उत्पादन में कमी आई है. वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि पिछले 3-4 महीने से लोगों ने खर्च में कमी की है. जिस कारण मार्केट में सुस्ती छाई हुई है.

मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने गिरती जीडीपी के आकंड़े पर कहा कि अगली तिमाही में जीडीपी बढ़ने की उम्मीद है. हम अभी भी यह कह रहे हैं कि  भारतीय अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी. 

कांग्रेस का मोदी सरकार पर निशाना-

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने जीडीपी के लगातार गिरने पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि पिछले 6 सालों में जीडीपी सबसे कम स्तर पर है. मगर बीजेपी गोडसे की राजनीति करने में लगी हुई है. 

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