नई दिल्लीः सरकारी बैंकों का करोड़ों रुपया डकारकर लंदन में बैठे उद्योगपति विजय माल्या ने एक बयान जारी करके अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत और राजनीति से प्रेरित बताया है. विजय माल्या ने कहा है कि वो तमाम बकाएदारों का पैसा चुकाने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी भी लगाई है कि उन्हें उनकी 14000 करोड़ की संपत्ति बेचकर बैंकों या दूसरे लोगों का पैसा चुकाने की इजाजत दी जाए.

विजय माल्या ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर पांच पेज का बयान जारी करते हुए CBI और ED चार्जशीट और आरोप पर बिंदुवार सफाई दी है. माल्या ने कहा कि उन्होंने किंगफिशर एयरलाइंस में पैसा पचाने के उद्देश्य से कर्ज लिए जबकि सच ये है कि यूबी ग्रुप ने उसमें अपनी तरफ से 4000 करोड़ रुपये डाले. अगर पैसा गबन करने की नीयत होती तो उसमें कंपनी की ओर से पैसा क्यों डाला जाता.

बैंक लोन, ईडी और सीबीआई चार्जशीट पर विजय माल्या के लंदन से जारी बयान की खास बातें :

विजय माल्या पोस्टर ब्वॉय: बैंक लोन डिफॉल्टर्स का पोस्टर ब्वॉय बना दिया मुझे
मुझ पर राजनेताओं और मीडिया ने आरोप लगाया है कि मैं 9000 करोड़ रुपए का कर्ज लेकर भाग गया हूं. केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई और ईडी ने सरकार और कर्ज देने वाले बैंकों के इशारे पर मेरे खिलाफ झूठे आरोप के साथ चार्जशीट दाखिल की है जो आरोप कोर्ट में ठहर नहीं सकते यानी साबित नहीं हो सकते. प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने मेरी, मेरी कंपनी, मेरे से जुड़े रिश्तेदारों की करीब 13900 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली है. संक्षेप में बैंक लोन डिफॉल्ट का मैं पोस्टर ब्वॉय बना दिया गया हूं. मैंने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को भी चिट्ठी लिखी है और अपने मामले से जुड़े तथ्य को सामने रख रहा हूं.

विजय माल्या और 17 बैंकों से 5500 करोड़ कर्ज का मामला
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई वाले 17 बैंकों के कंजोर्टियम ने किंगफिशर एयरलाइंस को 5500 करोड़ रुपए का कर्ज दिया. सारे कर्ज तमाम नियम-कानून का पालन करते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मंजूरी से दिए गए. इसमें 600 करोड़ रुपए की वसूली गिरवी रखी संपत्ति को बेचकर की गई है जबकि 1280 करोड़ रुपए कर्नाटक हाईकोर्ट में जमा है. एयरलाइन सेक्टर की बदहाली के कारण किंगफिशर एयरलाइंस हालात को संभाल नहीं सकी और फिर बैंक 5000 करोड़ की मूलधन राशि और करीब 1200 करोड़ के ब्याज की वसूली के लिए कर्ज वसूली प्राधिकरण चले गए. ये नोट करने लायक बात है कि मूलधन मात्र 5000 करोड़ ही है.

जान-बूझकर विजय माल्या या किंगफिशर एयरलाइंस के दिवालिया होने का मामला
मैंने सुप्रीम कोर्ट में बैंकों के केस दायर करने पर मार्च और अप्रैल 2016 में बकाया मूलधन 5000 करोड़ के बदले 4000 करोड़ के साथ-साथ 2000 करोड़ के एक लंबित केस में जो भी फैसला हो, उतना पैसा देने का ऑफर दिया. बैंकों ने दोनों ऑफर रिजेक्ट कर दिया. जबकि हाल के दिनों में नए दिवालिया कानून के तहत बड़े-बड़े कर्जदारों और बैंकों का वन टाइम सेटलमेंट बहुत ही कम में हुआ है. मेरे केस को उन मामलों को सामने रखकर देखना चाहिए. फिर मैंने स्टेट बैंक के चेयरमैन को जून में दो बार पत्र लिखकर सेटलमेंट के लिए बात करने का अनुरोध किया जिसका कोई समाधान नहीं निकला. इसलिए ये कहना कि मैं जानबूझकर दिवालिया हुआ या डिफॉल्ट हुआ, गलत है.

किंगफिशर एयरलाइंस के कर्मचारियों को सैलरी ना मिलने का मामला
किंगफिशर एयरलाइंस के कुछ कर्मचारियों ने सैलरी ना मिलने और वेतन ना मिलने से जीवन में तकलीफों की शिकायत की. ये याद दिलाऊंगा कि मेरी अगुवाई में यूबी ग्रुप में एक समय 66000 लोग काम करते थे और ज्यादातर ने 20-30 साल काम किया. अगर मैं कर्मचारियों का ख्याल नहीं रखता तो इतने सारे लोग, इतने लंबे समय तक मेरी कंपनी में काम नहीं करते. जब 2012 में किंगफिशर का लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया तो 2014 में यूबी ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया कि कंपनी किंगफिशर के कर्मचारियों के बकाए वेतन में से कुछ पैसा देना चाहती है लेकिन कोर्ट में वो मामला अब तक लंबित है और उस आवेदन पर कोई सुनवाई नहीं हुई है. मुझे बड़ी खुशी होगी अगर कर्नाटक हाईकोर्ट में जमा 1280 करोड़ रुपए पर 2013 से बने ब्याज से किंगफिशर कर्मचारियों के बकाया वेतन में कुछ भुगतान करने की इजाजत दी जाए.

विजय माल्या सीबीआई चार्जशीट पर बोले- आरोप में कोई दम नहीं
सीबीआई की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि आईडीबीआई बैंक के चेयरमैन और सीनियर अधिकारियों से मिलकर क्रिमिनल साजिश करके लोन लिया गया. लोन लेने के लिए झूठ बोलना और बेईमान रिकॉर्ड पेश करना, कर्ज के पैसे का गतल इस्तेमाल और दिवालिया होने पर बेईमान व्यवहार. 2009 में जब एसबीआई कैपिटल द्वारा किंगफिशर एयरलाइंस का वर्किंग कैपिटल गैप 2000 करोड़ आंका गया तो कंपनी ने स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनाइटेड बैंक वगैरह से 1250 करोड़ और आईडीबीआई बैंक से 750 करोड़ कर्ज लिया. 2010 में कंपनी के सारे कर्ज को रिजर्व बैंक की मंजूरी से मास्टर कर्ज एग्रीमेंट में बदला गया. यूबी ग्रुप ने भी कंपनी में 4000 करोड़ लगाया. यहां तक कि स्टेट बैंक ने भी जनवरी, 2012 में रिजर्व बैंक को चिट्ठी में स्टेट बैंक ने बताया है कि 2011 में 1158 करोड़ यूपी ग्रुप ने कंपनी में लगाया है. इसलिए ये कहना कि नीयत गलत थी या कर्ज पचाने के लिए ऐसा किया गया और जानबूझकर दिवालिया हो गई कंपनी, गलत है. दिवालिया होना होता तो कंपनी में यूबी ग्रुप से 4000 करोड़ क्यों लगाता.

ईडी द्वारा विजय माल्या की संपत्ति जब्त करने का मामला
प्रवर्तन निदेशालय ने अपराध से अर्जित आय और संपत्ति के नाम पर मेरी 9600 करोड़ की दो संपत्ति जब्त कर ली है. ईडी ने 1902 में खरीदी गई संपत्ति, वसीयत में मिली संपत्ति जैसी चीजें भी जब्त कर ली हैं जो किंगफिशर एयरलाइंस की शुरुआत से पहले की संपत्ति हैं और किसी भी तरह से ईडी के कथित अपराध की कमाई से अर्जित नहीं की जा सकतीं. ये शुद्ध रूप से मनी लाउंड्रिंग एक्ट में मिली अपार शक्ति का ईडी द्वारा राजनीतिक मकसद से दुरुपयोग है जिससे ये सवाल उठता है कि सरकार असल में क्या चाहती है कि मैं बैंकों का कर्ज वापस करूं या नहीं.

विजय माल्या के खिलाफ सीबीआई चार्जशीट का मामला
सीबीआई की चार्जशीट में मोटा-मोटी तीन आरोप हैं. पहला कि ना चुकाने के मकसद से फर्जी तरीके से लिया गया कर्ज, फंड का गबन और फंड का इस्तेमाल किंगफिशर एयरलाइंस की बजाय कहीं और करना. अगर ये सच होता तो सुप्रीम कोर्ट में 4000 करोड़ का सेटलमेंट ऑफर नहीं दिया गया होता जिसे स्टेट बैंक ने ठुकरा दिया. अगर नीयत खराब होती तो यूबी ग्रुप से 4000 करोड़ नहीं लगाया जाता. ये कुछ और नहीं मुझे पैसा लेकर भागने वालों का पोस्टर ब्वॉय बनाने का खेल है.

कर्नाटक हाईकोर्ट में विजय माल्या के कर्ज चुकाने के सेटलमेंट ऑफर
सरकार और इसकी एजेंसी ने मुझे तंग-तबाह कर रखा है. कर्ज चुकाने की मेरी कोशिश को या तो ये नजरअंदाज कर रहे हैं या समझ ही नहीं पा रहे. मैंने और मेरी कंपनी यूबी ग्रुप ने कर्नाटक हाईकोर्ट में 22 जून, 2018 को आवेदन देकर अपील की है कि कोर्ट की निगरानी में मुझे 13900 करोड़ की इस संपत्ति को बेचने का इजाजत दी जाए और उस पैसे से सरकारी बैंकों समेत तमाम बकाएदारों का पैसा चुकाने दिया जाए. बैंकों का मूल कर्ज 5000 करोड़ का है. बाकी सब ब्याज का है जो बेवजह के झमेले में मुझे फंसाकर समय की बर्बादी करके बढ़ा दी गई है. संपत्ति जब्त कर लेना, संपत्ति बेचने की इजाजत नहीं देना, ये सब कर्ज का ब्याज बढ़ाने के कारण हैं. एक तरह से बैंक, ईडी और सीबीआई की गलत नीयत से की गई कार्रवाई के कारण बैंकों का कुल बकाया बढ़ा है जिसमें मूलधन के बराबर अब ब्याज हो गया है.

अगर सीबीआई और ईडी मेरे इस आवेदन के तहत संपत्ति बेचकर कर्ज चुकाने का विरोध करते हैं तो ये साफ हो जाएगा कि इन लोगों की मंशा बैंकों को उनका पैसा वापस दिलाने के बजाय कुछ और है. मैंने ये पहले भी कहा है और फिर कह रहा हूं कि बैंकों का पैसा चुकाने की मैं पूरी कोशिश कर रहा हूं. अगर कोई राजनीतिक मंशा से इसमें बाधा खड़ी करता है तो मैं क्या कर सकता हूं.

क्या भारत के सारे रीति रिवाज और संस्कार भूल गए पंडित विजय माल्या ?