नई दिल्ली: पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन अब हमारे बीच नहीं रहे. चेन्नई स्थित आवास में आज रात करीब 09.30 बजे दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. भारत में अव्यवस्थित चुनाव प्रणाली को पटरी पर लाने का श्रेय टीएन शेषन को ही जाता है. टीएन शेषन भारत के 10वें चुनाव निर्वाचन अधिकारी थे. उन्होंने 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर 1996 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर अपनी सेवाएं दी. टीएन शेषन को भारत का सबसे प्रभावशाली मुख्य चुनाव आयुक्त माना जाता था.

मख्य निर्वाचन अधिकारी रहने के दौरान टीएन शेषन का तत्कालीन सरकार और दिग्गज नेताओं के साथ कई बार टकराव भी हुआ. हालांकि वे चुनाव की व्यवस्था को पटरी पर लाने से पीछे नहीं हटे. कानून का कड़ाई से पालन करते हुए टीएन शेषन ने चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने में सफल हो गए. आपको बता दें कि केरल के पलक्कड़ जिले के तिरुनेलै में जन्मे टीएन शेषन तमिलाडु कैडर से 1995 बैच के आईएएस अधिकारी थे.

टीएन शेषन ने 27 मार्च 1989 से लेकर 23 दिसंबर 1989 तक भारत के 19वें कैबिनेट सचिव के रूप में सेवा दी. टीएन शेषन ने चुनाव आयुक्त के तौर पर मतदाता पहचान पत्र की शुरुआत की थी. टीएन शेषन को सरकारी सेवाओं के लिए 1996 में रमन मैग्सेसे अवॉर्ड से नवाजा गया था. साल 1997 में टीएन शेषन ने राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. टीएन को के आर नारायण ने हराया था. इतना ही नहीं रिटायर होने के बाद भी टीएन शेषन ने देशभक्त ट्रस्ट की स्थापना की और समाज सुधार में लगे रहे.

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