नई दिल्ली. सीबीआई प्रमुख पद से हटाए जाने से नाराज आलोक वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सिलेक्ट कमेटी की मीटिंग में तय किया गया था कि आलोक वर्मा को उनके पद से बर्खास्त कर दिया जाए क्योंकि उन्होंने संस्थान की गरिमा को नुकसान पहुंचाया है. आलोक वर्मा को सीबीआई डायरेक्टर पद से हटाकर फायर सर्विस और होम गार्ड का डीजी बनाया गया था जिसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि वो अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं.

गौरतलब है कि आलोक वर्मा इसी महीने की 31 जनवरी को रिटायर हो रहे थे. लेकिन सीबीआई बनाम सीबीआई विवाद के चलते सरकार ने आधी रात उनसे उनके सारे अधिकार छीनते हुए उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया था. जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके पक्ष में  फैसला सुनाते हुए उन्हें बहाल करने का फैसला दिया था, हालांकि कोर्ट ने कहा था कि सिलेक्ट कमेटी की मीटिंग होने तक वो कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे. 

इस बीच गुरुवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में सिलेक्ट कमेटी की मीटिंग हुई जिसमें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के प्रतिनिधि के तौर पर जस्टिस सीकरी और विपक्ष की तरफ से लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिाकर्जुन खड़गे मौजूद थे. मीटिंग में 2-1 के बहुमत से आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाने का फैसला लिया गया. हालांकि मल्लिकार्जुन खड़गे ने आलोक वर्मा का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें अपनी सफाई देने का मौका मिलना चाहिए लेकिन बहुमत का फैसला उनके खिलाफ था हिहाजा उन्हें उनके पद से हटाने का फैसला ले लिया गया. 

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