गुवाहाटी. नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन के फाइनल ड्राफ्ट पर जमकर राजनीति हो रही है. मामले पर मच रहा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला गुवाहाटी का है जहां पर सेना से रिटायर मोहम्मद ए हक का नाम एनआरसी लिस्ट में नहीं है. मोहम्मद हक का कहना है कि उन्होंने सेना को तीस साल दिए हैं और उन्हीं का नाम फाइनल ड्राफ्ट से गायब है. इस बात का उन्हें बेहद दुख है.

उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ 30 तक सेना की सेवा की. अपना फर्ज भी निष्ठा के साथ निभाया. उनके पास परिजनों के कानूनी दस्तावेज भी हैं. इस मामले में पारदर्शिता के साथ जांच हो. पता हो कि असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन का फाइनल ड्राफ्ट सोमवार को जारी किया गया. इस ड्राफ्ट की लिस्ट में 40 लाख लोगों के नाम नहीं हैं. हालांकि सरकार ने कहा है कि जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं हैं उनको विदेशी नागरिक घोषित नहीं किया जाएगा.

असम देश का इकलौता ऐसा राज्य है जहां पर एनआरसी लागू किया गया है. इसके बाद से देश के दूसरे राज्यों में भी एनआरसी लाए जाने की मांग उठने लगी है. दरअसल असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या को लेकर विवाद चलता रहा है. 80 के दशक में इस मामले को लेकर छात्रों ने आंदोलन भी किया था. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और असम गण परिषद के बीच एक समझौता हुआ. इस समझौते के तहत साल 1971 तक जितने बांग्लादेशी असम में घुसे उन्हें नागरिकता दी जाएगी बाकियों को निर्वासित कर दिया जाएगा.

इसके बाद सात बार एनआरसी जारी करने को लेकर कोशिशें की गईं लेकिन सफलता नहीं मिली. साल 2013 में ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और शीर्ष अदालत के आदेश के बाद 30 जुलाई को एनआरसी जारी की गई.

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