नई दिल्ली : किसान आंदोलन पिछले दो महीनों से केंद्र सरकार के बनाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ राजधानी में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन, अब किसान आंदोलन दिन ब दिन नया जोर पकड़ता जा रहा है. अब यह न केवल पंजाब हरियाणा के किसानों का आंदोलन रह गया है बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसान भी दिल्ली कूच कर चुके हैं. ऐसे में भाजपा की मुश्किलें केंद्र के अलावा राज्यों में भी बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं. खास तौर पर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की दिक्कतें बढ़ने वाली है. मना जा रहा है कि अप्रैल माह में होने वाले पंचायत चुनाव उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं. साथ ही किसान आंदोलन का असर यूपी के विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है.

दरअसल, जब उत्तर प्रदेश सरकार ने गाजीपुर बार्डर खाली कराने का ऐलान किया और भारी पुलिस बल खड़ा कर दिया था. बार्डर तो खाली नहीं हुआ लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसका विरोध जरूर शुरू हो गया. खाप पंचायतों की एकजुटता भी बढ़ी और रालोद नेता चौधरी अजित सिंह भी सक्रिय हो गए. जाट समुदाय की नाराजगी बढ़ती देख भाजपा भी अब सक्रिय हो गई है और गांव-गांव तक भाजपा नेताओं ने अपना संपर्क बढ़ा दिया है. साथ ही स्थानीय स्तर पर सह संगठन मंत्री कर्मवीर, पंकज सिंह व अन्य नेता लोगों को समझा रहे हैं कि यह सरकार किसानों के खिलाफ नहीं है. वहीं भाजपा नेता किसान कानूनों को लेकर भ्रम भी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं.

बता दें कि अबतक केंद्र सरकार और किसानों के बीच कोई सुलहा नहीं हो पायी है और लगातार किसानों का आंदोलन जारी है. वहीं किसान भी तीनों कानूनों की वापसी की मांग पर अड़े हुए हैं. ऐसे में भाजपा की दिक्कतें बढ़ सकती हैं. गौरतलब है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 44 सीटें हैं, जिन पर आगमी वर्ष चुनाव होने हैं.

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