नई दिल्ली: नए कृषि कानून के खिलाफ पिछले चार दिन से गहमागहमी ओर भी बढ़ा गयी हैं क्योंकि किसानों का कहना हैं कि यदि सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हम राजधानी में आने वाले सभी पांच मार्ग को बंद कर देगें। जानकारी के लिए बता दें कि प्रदर्शनकारियों ने अब तक केवल सिंघु व टिकरी बॉडर्र को ही ब्लॉक कर रखा था। लेकिन अब वे गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद को भी बंद करने की बात कर रहे हैं। किसानों का कहना हैं कि हम प्रदर्शन के लिए बुराड़ी नहीं जाएगें। इस पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने घर पर उच्चतरीय बैठक कर बात की।

अमित शाह ने किसानों से कहा की किसान भाई बुराड़ी मैदान पहुंचे। हमारा केंद्रीय मंत्री मंडल आपकी हर बात सुनने को तैयार हैं। लेकिन प्रर्दशनकारियों ने अमित शाह के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया हैं। किसानों का कहना हैं कि हम एक ओर रात सिंघु व टिकररी बोर्डर पर बिताने को तैयार हैं परंतु हमें अमित शाह से बातचीत का प्रस्ताव स्वीकरा नहीं हैं। शाह चाहतें हैं कि किसान भाई अपने प्रदर्शन की जगह बदलें लें। इस पर किसानों ने कहा कि बुराड़ी मैदान एक जेल हैं। हम बार्डर पर दिन बिता देगें। लेकिन कहीं ओर नहीं जाएगें।

वहीं दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन की पंजाब इकाई के अध्यक्ष व करीब 30 किसान संगठन ने अमित शाह के प्रस्ताव को अस्वीकार कर कहां कि हम बिना शर्त के किसी भी प्रकार की बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। साथ ही ना हीं हम अपना घेराव खत्म करेगें। बल्कि यदि सरकार ने हमारी शर्त नहीं सुनी तो हम राजधानी की सभी मार्ग को बंद कर देगें। हम बुराड़ी मैदान में नहीं जाएं वह एक खुली जेल हैं।

किसानों के एक दल ने निरंकारी समागम मैदान में अपना प्रदर्शन जारी रखा। वहीं दूसरी ओर कोरोना वायरस व सर्दी के मौसम को देखते हुए  केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने किसानों से बुराड़ी जाने का अनुरोध किया। भल्ला ने कहा की बुराड़ी में पर्याप्त इंतेजाम हैं। आपको किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होगी आप अपना प्रदर्शन बुराड़ी में जारी रख सकते हैं। वहीं केंद्र सरकार आपसे 3 दिसंबर को कानून पर विस्तृत बातचीत को तैयार हैं। लेकिन फिर भी कोई किसान बुराड़ी जाने को तैयार नहीं हुएं।

वहीं केंद्र गृह मंत्री अमित शाह 3 दिसंबर को बुराड़ी में बातचीत को तैयार हैं। लेकिन कोई भी किसान बोर्डर से हटने को तैयार नहीं क्योंकि वे अपनी शर्त पर टिके हैं। उनका कहना हैं कि सरकार हम बहका रही हैं। लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे जब तक हमारी शर्त नहीं मानी जाती तब तक बार्डर से नहीं हिलेगें।

 

मन की बात में क्या कहा पीएम मोदी ने –

प्रधानमंत्री ने अपने मन की बात के रविवार के कार्यक्रम के बारे में कहा की भारत में किसान भाईयों के लिए नई संभावना बढ़ाई जा रही हैं। साथ ही खेती से जुड़ी चीजों के साथ नए आयाम भी बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी पार्टियां किसानों से जुड़ी समस्या को हमेशा बढ़ाती रही हैं। कभी उसे हल करने की कोशिश नहीं की। लेकिन हमारी सरकार ने किसानों को ध्यान में रखते हुए कई कार्य किए हैं। संसद ने विचार-विमर्श के बाद कृषि सुधार को कानूनी रुप दिया। लेकिन अब कुछ पार्टियां स्वार्श हित के चलते किसान भाईयों को भटका रही हैं। सरकार के कानून से किसानों को नए अधिकार व अवसर की प्राप्ति भी होगी। साथ ही मिलने वाले अधिकार किसानों की परेशानियों को समाप्त कर देंगें।

 

सीमा पर डटे किसान –

किसान संगठन से जुड़े किसान नेताओं का कहना हैं कि हरियाणा व पंजाब से किसान प्रदर्शन में शामिल होगा। वरन् वह किसान के नए कानून को पुरजोर विरोध करेगा। वहीं दूसरी ओर हरियाणा के दादरी के निर्दलीय विधायक ने कहा की हरियाणा के अनेक किसान हमारे साथ शामिल होगें और राजधानी की ओर मार्च करेगें। हाल में किसान सरकार के खिलाफ नारे बाजी कर रहे हैं और बार्डर से हिलने का नाम नहीं ले रहें। ऐसे में सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति द्वारा किसानों को भोजन की पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही हैं।

 

किसान आंदोलन को लेकर उच्चस्तरिय बैठक –

किसान आंदोलन को लेकर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर उच्चस्तरिय बैठक की गई। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए। किसानों की समस्या व बढ़ते प्रदर्शन को देखते हुए विस्तृत विचार किया गया। इस मीटिंग के मायने निकालें तो सरकार किसानों की समस्या के हल के लिए जल्द ही कुछ महत्वपूर्ण फैसला देगी। सरकार द्वारा बैठक इसलिए बुलाई क्योंकि अमित शाह का प्रस्ताव ठुकराने के प्रदर्शन ओर भी उग्र होता जा रहा था।

 

आंदोलन को लेकर किसान जल्द लेगी निर्णय –

हाल में हुई सरकार की बैठक से लगता हैं कि सरकार आंदोलन को समाप्त करने के लिए नए सिरे से पहल करेगी। इसके लिए किसान नेताओं से लेकर सभी बड़े किसान संगठन से बातचीत की जाएगी। सरकार चाहती हैं कि किसान हाईवे से हटकर प्रदर्शन करें ताकि आवागमन वापस से सुचारु हो सकें। वहीं दूसरी ओर किसानों को गुरुग्राम व गाजियबाद बोर्डर जाने से रोकना हैं।

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