देशभर में कोरोना अपना आतंक बरपा रहा है। हालत चिंताजनक हो गए है। देश के सभी राज्यों में मरीन रेमडेसिविर के एक एक इंजेक्शन के लिए, तो कहीं ऑक्सीजन के एक एक सिलेंडर के लिए तड़प रहे है। ऐसी सिचुएशन में भी कई लोगों ने इसे अवसर में बदल लिया है। रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन सिलेंडर की ब्लैकमार्केटिंग शुरू कर दी है। इन दिनों तो बाजार में नकली दवाइयों और रेमडिसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी भरपूर चल रही है।

बीते दिनों यूपी और एमपी में कुछ लोग नकली दवाई बेचते हुए पकड़े गए थे। यदि आप अपने परिजन के लिए रेमडेसिवीर इंजेक्शन लेने गए है तो इंजेक्शन को ध्यान से खरीदे। कहीं कोई मुनाफाखोर आपको नकली रेमडिसिविर इंजेक्शन न दे दें। असली और नकली रेमडेस‍िव‍िर इंजेक्‍शन का अंतर समझाने के ल‍िए आईपीएस ऑफिसर मोनिका भारद्वाज ने ट्वीट कर लोगों को ये समझााया क‍ि दोनों में फर्क कैसे समझा जाए। उन्होंने नकली पैकेट पर मौजूद कुछ गलतियों की तरफ इशारा किया है, जो इसे असली पैकेट से अलग करने में मदद कर सकते हैं। आइए कुछ प्वाइंट से हम आपको समझाते है।

  1. नकली रेमडेसिविर के पैकेट पर इंजेक्शन के नाम से ठीक पहले ‘Rx‘ नहीं लिखा हुआ है।
  2. असली पैकेट पर ‘100 mg/Vial’ लिखा हुआ है, जबकि नकली पैकेट पर ‘100 mg/vial’ लिखा हुआ है। यानी केवल Capital V का अंतर है।
  3. असली पैकेट पर ‘For use in’ लिखा हुआ है और नकली पैकेट पर ‘for use in’ लिखा हुआ है। यानी Capital F का अंतर है।
  4. असली पैकेट के पीछे चेतावनी लेबल लाल रंग में है, जबकि नकली पैकेट पर चेतावनी लेबल काले रंग में है।
  5. नकली रेमडेसिविर के पैकेट पर चेतावनी लेबल के ठीक नीचे मुख्य सूचना ‘Covifir’ ब्रांड नाम is manufactured under the licence from Gilead Sciences, Inc’ नहीं लिखी हुई है।
  6. नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन वाले पैकेट पर पूरे पते में स्पेलिंग की गलतियां हैं। जैसे नकली पैकेट पर ‘Telangana‘ की जगह ‘Telagana‘ लिखा हुआ है।

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