नई दिल्ली. यूरोपियन यूनियन के 27 सांसद 28 नवंबर को भारत आए. इसी दिन दिल्ली में उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से हुई. अगले दिन यानी 29 नवंबर को 27 में से 23 सांसद कश्मीर की यात्रा पर गए. तीसरे दिन यानी कि आज 30 नवंबर को इन सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने कहा कि कश्मीर के हालात सामान्य हैं. इस यात्रा को आयोजित किया था मादी शर्मा नाम की एक महिला ने जो अपने आप को इंटरनेशनल बिजनेस ब्रोकर बताती हैं. इस यात्रा का खर्च उठाया दिल्ली बेस्ड एक NGO इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नॉन एलाइंड स्टडीज (IINS) ने जिसका स्वामित्व श्रीवास्तव ग्रुप के पास है. कांग्रेस सहित सारा विपक्ष इस यात्रा को भारत की कश्मीर नीति के खिलाफ बता रहा है. इस पूरे मामले में कई पेंच हैं जिनको सिलसिलेवार तरीके से हम आपको समझाने की कोशिश करेंगे. 

कौन हैं मादी शर्मा जिन्होंने 27 यूरोपियन यूनियन के सांसदों की कश्मीर यात्रा का आयोजन किया

मादी शर्मा लंदन बेस्ड बिजनेसवुमन हैं. वो अपने आप को इंटरनेशनल बिजनेस ब्रोकर बताती हैं. उनका एक एनजीओ है जिसका नाम वुमन्स इकोनॉमिक एंड सोशल थिंक टैंक (WESTT) है. उनकी वेबसाइट मादी शर्मा ओआरजी पर उनके परिचय में लिखा है, मादी एक उधमी हैं जिन्होंने मादी ग्रुप की स्थापना की. मादी ग्रुप ऑफ इंटरनेशनल प्राइवेट सेक्टर एंड नॉट फोर प्रॉफिट कंपनी और एनजीओ चलाती हैं. मादी शर्मा के कई रूप हैं, वो बिजनेस एडवाइजर हैं, लॉबिस्ट हैं, पब्लिक स्पीकर हैं, एनजीओ चलाती हैं यहां तक की पत्रकार भी हैं.

श्रीवास्तव ग्रुप के अखबार न्यू दिल्ली टाइम्स में वो लिखती रहती हैं. इसके अलावा ईपी टुडे नाम की एक वेबसाइट जिसका पूरा नाम है मंथली न्यूज मैगजीन फॉर यूरोपियन पार्लियामेंट में भी लिखती रहती हैं. यहां बता दें कि इस वेबसाइट पर अधिकांश कंटेंट रूस की वेबसाइट रशिया टु़डे से कॉपी पेस्ट की जाती थी. इस वेबसाइट को फर्जी घोषित करते हुए यूरोपियन यूनियन ने 2 लाख पाउंड का जुर्माना भी लगाया था. मादी शर्मा की पढ़ाई लिखाई इंग्लैंड के शहर नॉटिंघम में हुई है. इससे पहले वो बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ यूरोपियन सांसदों की मुलाकात करवा चुकी हैं. 

श्रीवास्तव ग्रुप जिसने 27 यूरोपियन यूनियन के सांसदों की भारत यात्रा का खर्चा उठाया

श्रीवास्तव ग्रुप ने इस यात्रा का खर्च वहन किया है. श्रीवास्तव ग्रुप की स्थापन 1995 में हुई थी. इस वक्त इसकी आठ कंपनियां हैं और भारत के अलावा बेल्जियम, स्वीटजरलैंड और कनाडा में भी ऑफिस है. श्रीवास्तव ग्रुप की कंपनियां हैं, एएनआर हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, श्रीवास्तव मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड, न्यू दिल्ली एविएशन प्राइवेट लिमिटेड, इंटरनेशनल ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन, ए टू एन ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन,ए टू एन एनर्जी, न्यू दिल्ली पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड है. इसके अलावा तीन अखबार न्यू दिल्ली टाइम्स, नई दिल्ली टाइम्स और न्यूज फ्रॉम नॉन एलाइंड भी निकालती है. श्रीवास्तव ग्रुप ने ही इस पूरी यात्रा का खर्च उठाया है.

मादी शर्मा ने कैसेे किया इतने बड़े आयोजन का इंतजाम

मादी शर्मा ने यूरोपियन यूनियन के सांसदों को कश्मीर यात्रा का न्योता देने के लिए इमेल में लिखा, ‘मैं एक प्रतिष्ठित वीआईपी मीटिंग का आयोजन कर रही हूं भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ. यह मेरा सौभाग्य है कि मैं इस आयोजन में आपको न्यौता भेज रही हूं. जैसा कि आपको मालूम होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में लोकसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज की है. वह भारत को ऐसे ही विकास के रास्ते पर ले जाना चाहते हैं. इसी सिलसिले में वो प्रभावशाली निर्णय लेने वाले यूरोपियन यूनियन के सदस्यों से मिलना चाहेंगे. 3 दिनों की इस भारत यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात, कश्मीर यात्रा और तीसरे दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस शामिल है. मादी शर्मा ने इमेल में लिखा कि इस यात्रा का सारा खर्च दिल्ली बेस्ड गैर सरकारी संगठन (NGO) इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर नॉन एलाइंड स्टडीज (IINS) ने उठाया था. इसका दफ्तर दिल्ली के सफदरगंज एनक्लेव पर है. कमाल की बात है कि मादी शर्मा ने अपने इमेल में जो लिखा ठीक वहीं हुआ भी. इससे यह साफ जाहिर होता है कि मादी शर्मा प्रधानमंत्री कार्यालय के संपर्क में थीं. इस यात्रा पर भारत सरकार की तरफ से सहमति पहले ही मिल चुकी थी. 

 

 

मादी शर्मा ने जो इमेल यूरोपियन यूनियन सांसदों को भारत यात्रा पर आमंत्रित करने के लिए लिखा

दो सांसदों ने आने से कर दिया इनकार, 4 सांसद कश्मीर गए ही नहीं…

मादी शर्मा के इमेल के जवाब में ब्रिटेन के सांसद क्रिस डेविस ने अपनी सहमति जताई लेकिन कुछ शर्तों के साथ. क्रिस डेविस ने लिखा कि उन्हें कश्मीर में मुक्त रूप से घूमने और लोगों से मिलने दिया जाए. इस दौरान कोई भी सुरक्षाकर्मी उनके पास न हो.इसके बाद मादी शर्मा ने इमेल लिखकर उनका निमंत्रण कैंसल कर दिया यह कहते हुए कि हम और सांसदों को नहीं ले जा सकते. क्रिस डेविस ने इसके बाद बयान जारी कर कहा है कि वो कश्मीर पर नरेंद्र मोदी सरकार के पब्लिक रिलेशन स्टंट का हिस्सा नहीं बनना चाहते. इसके अलावा जो 27 सांसद भारत आए थे उनमें से 22 धुर दक्षिणपंथी पार्टियों से जुड़े हुए हैं.यानी जिस तरह भारत में बीजेपी या शिवसेना है. इनमें से भी 4 सांसद कश्मीर गए ही नहीं और दिल्ली में ही रुके रहे. बता दें कि भारत का विदेश मंत्रालय पहले ही साफ कर चुका है कि यह एक निजी यात्रा है और  इसका विदेश मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है. 

विपक्ष के सवाल जिनके जवाब मिलने बाकी हैं

पहला सवाल- एक प्राइवेट NGO से जुड़ी मादी शर्मा ने किस हैसियत से प्रधानमंत्री के साथ मिलवाने और कश्मीर ले जाने का बात यूरोपियन यूनियन के सांसदों से कर रही है. क्या प्रधानमंत्री और पीएमओ की सहमति से यह यात्रा आयोजित हुई.

दूसरा सवाल- विपक्ष लगातार पूछ रहा है कि आखिर जब भारत के विपक्षी दलों के सांसदों को कश्मीर नहीं जाने दिया गया तो इन विदेशी सांसदों को कैसे इसकी अनुमति दी गई. 

तीसरा सवाल- विपक्ष बेहद तीखे शब्दों में ईयू सांसदों के विजिट को आजाद भारत में केंद्र सरकार का सबसे बड़ा ब्लंडर बता रहा है. क्या भारत की विदेश नीति और कश्मीर नीति के उलट जाकर यह कदम क्यों उठाया गया है. जब भारत का स्पष्ट रूख है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष के दखल की गुंजाइश नहीं है तो कैसे यूरोप के इन सांसदों को यह अधिकार दिया गया. 

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