नई दिल्ली. भारत रत्न एम विश्वेश्वरैया के जन्मदिन 15 सितंबर पर देश में इंजीनियर्स डे मनाया जाता है. भारत में बड़े बांध और डैम की संकल्पना को साकार करने वाले एम विश्वेश्वरैया को 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. इंजीनियर्स डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत सहित कई बड़े नेताओं ने ट्विटर के जरिए बधाई दी है.

बता दें कि सर एम विश्वेश्वरैया का जन्म बेंगलुरू के पास 1861 में हुआ था. उन्हें ब्रिटिश सरकार ने नाइटहुड की उपाधि भी दी थी. उन्हें फादर ऑफ मॉर्डन मैसूर भी कहा जाता है. उन्होंने 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान रहते हुए पूरे सूबे को एक मॉडल स्टेट में तब्दील कर दिया. देश के कई हिस्सों को बाढ़ की तबाही से बचाने में उनका अहम योगदान है. मैसूर के कृष्णा राज सागर डैम प्रोजेक्ट जो तब एशिया का सबसे बड़ा डैम था उसके चीफ इंजीनियर की जिम्मेदारी एम विश्वेश्वरैया को ही दी गई.

इसके बाद उन्हें हैदराबाद को बाढ़ मुक्त करने की जिम्मेदारी दी गई. उन्होंने ही विशाखापट्नम को समुद्र की तबाही से बचाया. इसके बाद 1917 में एम विश्वेश्वरैया ने बेंगलुरु में गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की जो बाद में यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के नाम से जाना गया. सर विश्वेश्वरैया ने लंबा और शानदार जीवन जिया. 1962 में 101 साल की उम्र में उनका निधन हुआ.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इंजीनियर्स डे की बधाई दी

देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी अपने ट्विटर हैंडल से इंजीनियर्स डे की बधाई दी

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी ट्विटर पर दी बधाई

जब हजारों अंग्रेज एक भारतीय की बुद्धिमत्ता से रह गए थे दंग
एक बार एम विश्वेश्वरैया ट्रेन से जा रहे थे. ट्रेन में अधिकांश अंग्रेज सवार थे. अचान एम विश्वेश्वरैया अपनी सीट से खड़े हुए और ट्रेन की जंजीर खींच दी. ट्रेन रुक गई. लोग उनके ऊपर चिल्लाने लगे. अंग्रेजों को लगा कि यह सांवला सा भारतीय कौन है जो उनकी शान में गुस्ताखी कर रहा है. इतनी देर में ट्रेन का गार्ड भी उनके पास पहुंच गया. उनसेे पूछा गया कि उन्होंने ट्रेन की जंजीर क्यों खींची. इस पर एम विश्वेश्वरैया ने कहा कि मुझे लगता है कि ट्रेन की पटरी लगभग 220 गज आगे टूटी हुई है.

इस पर सभी लोग चौंके कि यह बात उन्हें कैसे पता. एम विश्वेश्वरैया ने कहा कि मैं एक इंजीनियर हूं और ट्रेन की गति और पटरी पर उसकी आवाज में अंतर से मुझे अंदेशा है कि ट्रेन की पटरियां आगे टूटी हुई हैं. सभी लोग आगे गए और वाकई ट्रेन की पटरी के सारे नट बोल्ट खुले हुए थे. अगर एम विश्वेश्वरैया ने ट्रेन नहीं रोकी होती तो बड़ा हादसा हो जाता. अब सभी लोग उनसे माफी मांगने लगे लेकिन बड़े दिल के एम विश्वेश्वरैया ने कहा कि मैंने तो सुना ही नहीं कि आप लोगों ने मेरे बारे में क्या कहा. भारत के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियर के जन्मदिन पर आपको भी अभियंता दिवस की बधाई.

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