July 18, 2024
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Election: एमपी में बीजेपी की जीत के असली हीरो है सीएम शिवराज, दिलचस्प है उनका सियासी यात्रा

  • WRITTEN BY: Sachin Kumar
  • LAST UPDATED : December 4, 2023, 7:54 pm IST

नई दिल्लीः एमपी में कांग्रेस को चारों खाने चीत करने के बाद बीजेपी के हौसले बुलंद है। भाजपा के अलाकमान ने जहां चुनाव प्रचार में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। वहीं सीएम शिवराज ने प्रचार प्रसार में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उन्होंने लगातार पार्टी के लिए मेहनत किया। हालांकि पार्टी ने इस बार उनको सीएम पद का चेहरा घोषित नही किया। जिसके चलते वो नाराज भी थे और कई बार लोगों से भावुक अपील की। इसके बावजूद जनता ने उनके काम पर मुहर लगा दी है। ऐसे में बीजेपी आलाकमान एक बार फिर से उनपर भरोसा करने का विचार कर सकती है। ऐसे में आईए जानते है शिवराज का सियासी सफर, जो लगातार 18 सालों से सीएम पद पर आसीन है

मामा के नाम से प्रसिद्ध

23 मार्च 2020 को मध्यप्रदेश के चौथी बार मुख्यमंत्री बने बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान को एक कुशल प्रशासक के साथ ही बेहद शांत और मिलनसार नेता के रुप में जाना जाता है। किसान परिवार में जन्में हुए चौहान ने सबसे लंबे समय 18 साल तक लगातार मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने का इतिहास रचा है। सीएम शिवराज सिंह चौहान प्रदेश, जनता के बीच विशेष रूप से बच्चों में मामा के नाम से लोकप्रिय हैं। पहले वह लोकसभा सीट विदिशा में अमूमन पैदल चलने के कारण ‘पांव-पांव वाले भैया’ के नाम से विख्यात थे।

चार बार संभाल चुके है सीएम की कुर्सी

शिवराज सिंह चौहान 29 नवंबर 2005 को पहली बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रुप में शपथ लिए थे। उनके कमान में 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को भारी बहुमत मिली थी। बीजेपी ने उन्हें नवंबर 2018 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी का मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया था, लेकिन इस चुनाव में वह अपनी पार्टी को सत्ता में नहीं ला सके और सरकार कांग्रेस नेता कमलनाथ के हाथ में चली गई।

2020 में फिर से बने सीएम

बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने और कांग्रेस के 22 विधायकों के बागी होने के कारण कमलनाथ की सरकार बहुमत के आंकड़े से पीछे आ गई। जिसके कारण कमलनाथ ने विशवास मत से ठीक पहले 20 मार्च को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस के इन 22 बागी विधायकों का इस्तीफा मंजूर होने के बाद ये सभी नेता बीजेपी में शामिल हो गए थे। इसके बाद कांग्रेस के पास मात्र 92 विधायक रह गए और बीजेपी 107 विधायकों के साथ बहुमत में आ गई। जिसके बाद बीजेपी विधायक दल ने चौहान को अपने दल का नेता चुना और वह 23 मार्च 2020 को चौथी बार मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए।

पांच बार सांसद भी रह चुके है शिवराज

मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2005 से वर्ष 2018 तक के कार्यकाल में शिवराज ने मध्य प्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकाला। वह साधारण जीवन जीना पसंद करते हैं। शिवराज ने देश की राजनीति की बजाय मध्य प्रदेश की राजनीति में अपने को बनाए रखा। शिवराज इस बार छठी बार सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट जीतकर आए है। इसके अलावा, वह विदिशा लोकसभा सीट से वर्ष 1991 से वर्ष 2006 तक पांच बार लगातार सांसद भी रह चुके है।

सीहोर है जन्मस्थान

सीहोर जिले के जैत गांव में पांच मार्च 1959 को किसान प्रेम सिंह चौहान एवं माता सुन्दर बाई चौहान के घर में जन्मे शिवराज में नेताओं वाला का हुनर तब सबसे पहले सामने आया, जब वह वर्ष 1975 में मॉडल हायर सेकेण्डरी स्कूल के छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गये। उनको संगीत, अध्यात्म, साहित्य एवं घूमने-फिरने में विशेष रूचि है। उनकी पत्नी साधना सिंह हैं और उनके दो बच्चें कार्तिकेय एवं कुणाल है। कार्तिकेय कारोबारी हैं, जबकि कुणाल अभी पढ़ रहे हैं। शिवराज ने पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है।

आपातकाल के दौर से राजनीति में सक्रिय

चौहान 1972 में 13 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के संपर्क में आये। 1975 में आपातकाल के आंदोलन में हिस्सा लिया और भोपाल जेल में बंद रहे। इसके अलावा भाजपा युवा मोर्चा यानी भाजयुमो के प्रांतीय पदों पर रहते हुए उन्होंने विभिन्न छात्र आंदोलनों में भी भाग लिया। उमा भारती और बाबूलाल गौर के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर 29 नवंबर 2005 को पहली बार शपथ लेने वाले चौहान यहां लगातार दूसरी बार 2008 में और तीसरी बार 2013 में भी मुख्यमंत्री बने और दिसंबर 2018 तक मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे। इसके बाद वह 23 मार्च 2020 को चौथी बार मुख्यमंत्री के पद को संभाले।

संगठन के कई पदों पर किया काम

साल 2000 से 2003 तक भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए शिवराज सिंह ने पार्टी की युवा इकाई को मजबूत करने के लिए जीतोड़ मेहनत की। इस दौरान वे सदन समिति यानी लोकसभा के अध्यक्ष और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव भी रहे। वह वर्ष 2000 से 2004 तक संचार मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहने के साथ ही पांचवीं बार विदिशा से चौदहवीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।

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