नई दिल्लीः आपने हिमयुग के बारे में तो सुना होगा. हिमयुग का इतिहास हजारों-करोड़ों साल पुराना माना जाता है. इतिहास में पांच हिमयुगों का जिक्र किया जाता है. इसमें पृथ्वी की सतह और वायुमंडल का तापमान काफी लंबे समय के लिए कम हो जाता है, जिस से महाद्वीपों के बड़े भूभाग पर ग्लेशियर फैलने लगते हैं. ऐसे हिमयुग पृथ्वी पर बार-बार आए हैं और वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में एक बार फिर हिमयुग का दौरा आएगा. बहरहाल बात करें ‘मेघालयी युग’ की तो इसकी शोध में पता चला है कि करीब 4200 साल पहले घटी जलवायु घटना के चलते इसे यह नाम दिया गया है.

इसे पृथ्वी की सबसे हालिया जलवायु घटना के तौर पर देखा जा रहा है. धरती के इतिहास में इसे सबसे छोटी जलवायु घटना माना रहा है. इसने करीब 200 साल तक अपना असर दिखाया. कई सभ्यताएं (मिस्र, ग्रीस, सीरिया, यूनान, फिलीस्तीन, मेसोपोटामिया, सिंधु घाटी और यांग्त्से नदी घाटी सभ्यता) इससे प्रभावित हुईं. इसमें मनुष्यों का प्रवासन हुआ.

इसके बारे में कई साल से शोध चल रही है. भूवैज्ञानिकों की अगुवाई में शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय पहुंची, जहां उन्होंने मॉमलुह नामक गुफा में फर्श पर जमा हुए चूने के ढेर (जिसे स्टैलैग्माइट कहा जाता है) को एकत्रित किया. इसी पदार्थ की वजह से इस काल के बारे में जानने में शोधकर्ताओं को काफी मदद मिली.

वर्तमान युग को होलोसीन इपॉक के नाम से जाना जाता है. होलोसीन इपॉक अपने अंदर पिछले 11,700 वर्षों में हिमयुग से लेकर वर्तमान के बारे में अहम जानकारियां समेटे हुए है. इंटरनेशनल कमीशन ऑन स्ट्रैटिग्राफी (आईसीएस) के मुताबिक, होलोसीन खुद तीन भागों में विभाजित हो गया था, यह तीन भाग थे, अपर, मिडिल और लोअर फेज. इन तीनों चरणों में जलवायु परिवर्तन देखने को मिला.

अब ‘मेघालयी युग’ को होलोसीन इपॉक के दौर में घटी सबसे हालिया घटना माना जा रहा है. अभी तक होलोसीन के सबसे पुराने दौर को हिमयुग के अंत के तौर पर समझा जाता रहा है. धरती के इतिहास में ‘मेघालयी युग’ का नया अध्याय जुड़ने से इस शोध टीम में रहे वैज्ञानिक भी काफी उत्साहित हैं. फिलहाल इस पर रिसर्च जारी है. वहीं मेघालय के लोग इस नए युग का नाम मेघालय से जुड़ा होने पर काफी खुशी जता रहे हैं.

पृथ्वी पर 4200 साल पहले घटी घटना के बारे में भूवैज्ञानिकों ने पता लगाया, दिया नया नाम- मेघालयी युग

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