नई दिल्लीः ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के हुई बैठक के बाद बाद विधि आयोग अब समान नागरिक संहिता पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है. 21 मई को मुस्लिम लॉ बोर्ड के साथ हुई बैठक में बच्चा गोद लेने, उत्तराधिकारी और बाल विवाह जैसे कई मुद्दों पर विधि आयोग ने चर्चा की थी जिसके बाद आयोग इन मामलों पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थिति जानना चाहता है. इसके साथ ही आयोग ने मुस्लिम लॉ बोर्ड से अपनी राय जानने और अपनी स्थिति साफ करने को कहा है.

अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट द प्रिंट में छपी खबर के मुताबिक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ विधि आयोग की बैठक में बच्चा गोद लेने और उसपर अपनी स्थिति साफ करने के लिए कहा गया है. इस बैठक के बाद चल रही रिपोर्ट्स के मुताबिक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि गोद लिए गए बेटे के जवान होने के बाद उसके अपनी मां के साथ यौन संबंध बन जाने की आशंका रहती है. इसके साथ ही इस बात की आशंका रहती है कि गोद लिए गए बच्चे के बड़े होने पर वो अपनी जैविक बहन के साथ सेक्स संबंध बना सकता है इसी के चलते इस्लाम बच्चा गोद लिए जाने की इजाजत नहीं देता है. और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड विधि आयोग के सामने भी यही तर्क रखने वाला है.

इस बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक विधि आयोग के सदस्यों की तरफ से इस बात के भी संकेत मिले हैं कि आयोग यूनीफॉर्म सिविल कोड लागू कराने के बजाय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में कुछ बदलावों की सिफारिश करेगा. इस बैठक के बाद इस मामले पर बात करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारुखी ने बताया कि विधि आयोग पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े कुछ प्रावधानों में बदलाव करने के सुझावों की सिफारिश कर सकता है बशर्ते आयोग की तरफ से की गई सिफारिशें इस्लाम के साथ टकराव पैदा करने वाली न हों.

कमाल फारुखी ने साफ तौर पर कहा कि विधि आयोग की उन सिफारिशों को बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा जो इस्लाम के मूल सिद्धांतो के विरोधाभासी होंगी. उन्होंने कहा कि इस बैठक से पहले भी बच्चा गोद लेने के मामले पर टकराव की स्थिति बन चुकी है. लेकिन तब भी इस मामले पर किसी तरह का कोई नतीजा नहीं निकला था. लेकिन इस मीटिंग के बाद कुछ उम्मीदें लगाई जा सकती हैं.

बता दें कि इस 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर एक व्यवस्था की थी. जिसमें ये कहा गया था कि इस्लाम में बच्चा गोद लेने की मनाही है लेकिन अगर कोई मुस्लिम बाल न्याय के तहत बच्चा लेना चाहे तो उसको प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता. इसके अलावा इस्लाम में उत्तराधिकार के मामले पर अभी भी इस्लाम में विवाद बना हुआ है. जिसमें बेटी भाई की संपत्ति के आधे हिस्से की कानूनी हकदार होती है. जिसके खिलाफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस प्रावधान को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी हुई है.

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