चंडीगढ़. पंजाब में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की सरकार ने राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए डोप टेस्ट जरूरी कर दिया है. इसके लिए सीएम ने प्रदेश के मुख्य सचिव को अधिसूचना जारी करने आदेश दिया है. साथ ही कहा है कि डोप टेस्ट कब और कैसे होगा इसका प्रारूप तय किया जाए. बता दें कि नशे की खतरनाक समस्या से जूझ रहे राज्य को इससे निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री ने ये फैसला लिया है. सरकार द्वारा कराए जा रहे डोप टेस्ट की प्रक्रिया से राज्य की पुलिस को भी गुजरना होगा.

खबर है कि ये डोप टेस्ट किसी सरकारी कर्मचारी की भर्ती के समय तो कराया ही जाएगा. इसके अलावा उसके कार्यकाल के बीच और खासकर पदोन्नति के समय भी कराया जाएगा. जिससे पता लगाया जा सके कि कर्मचारी गांजा, एम्फेटामाइन, मॉर्फीन या और किसी प्रतिबंधित नशीली दवाओं के सेवन का आदी तो नहीं है. हालांकि पुलिस कांस्टेबल और सब इंस्पेक्टर की भर्ती के समय डोप टेस्ट पहले से ही कराया जाता है.

अमरिंदर राज्य में ड्रग्स की समस्या को लेकर काफी गंभीर हैं. हाल ही में उनकी अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंस (एनडीपीएस) कानून, 1985 में संशोधन किया गया. जिसमें ड्रग की तस्करी के लिए मौत की सजा की सिफारिश का फैसला हुआ. सीएम ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को खत लिखकर इसकी जानकारी दी.

आप विधायक भी नशे के खिलाफ मुहीम के तहत डोप टेस्ट कराने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं. आम आदमी पार्टी के विधायक अमन अरोड़ा ने अस्पताल पहुंचकर कहा कि कि मुख्यमंत्री और सभी मंत्रियों, विधायक आला अधिकारियों को भी भी डोप टेस्ट कराना चाहिए. वहीं पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तृप्त राजेन्द्र बाजवा भी मोहाली के हॉस्पिटल डोप टेस्ट के लिए पहुंचे. लेकिन उनके दवाई लिए होने के कारण टेस्ट नहीं हो पाया है, तो बाद में उनका टेस्ट किया जाएगा.

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