नई दिल्ली. कोरोना में जहां लोग एक दूसरे सी मदद के लिए आगे आ रहे हैं लोगों की जान बचाने में जुटे हुए हैं, लेकिन ऐसे में भी कुछ कंपनियां धड़ल्ले से लोगों की मजबूरी का फयादा उठाकर उन्हें हजारों की चीज लाखों में बेच रही है. सबसे ज्यादा देश में ऑक्सीजन कांट्रेक्टर की काला बजारी हो रही है. ऐसे में एक-एक करके मामले सामने आ रहे हैं. वही एक अभियान के तहत इंडिया न्यूज न सिर्फ आपके सामने ऐसी कंपनी का नाम उजागर कर रहा है बल्कि आप इन मामलो से कैस निपट सकते हैं, आप कैसे ठगी से बच सकते हैं और अगर कोई कंपनी आपको साथ फ्रॉड करने की कोशिश कर रही है तो आपके अधिकार क्या हैं हम आपको यही बताने जा रहे हैं.

डॅाक्टर ट्रस्ट एक ऐसी कंपनी है जो कोरोना काल में भी घोटालेबाजी कर रही है. इस कपंनी ने अब तक न जाने ऑक्सीजन कांट्रेक्टर देने के नाम पर कितने लोगों के साथ ठगी की होगी. डॅाक्टर ट्रस्ट कंपनी जिसका हेडक्वार्टर चंडीगढ़. यह एक अमेरिकन आधारित कंपनी है.

 ऑक्सीजन कांट्रेक्टर नाम पर महिला से ठगे 1 लाख 82 हजार

एक पीड़ित महिला ने पति के लिए 26 अप्रैल को 11 बजे सुबह ऑक्सीजन कांट्रेक्टर ऑनलाइन आर्डर किया. जिसका उनको मेल पर कन्फमेशन मेल भी आया. बुकिंग के समय 1 लाख 82 हजार रुपए लिए उन्होंने ऑक्सीजन कांट्रेक्टर के लिए दिए. 5 मई को महिला के पति की अचानक तबियत बिगड़ गई उन्होंने कंपनी से जल्दी डिलीवरी करने की गुजारिश की. ऑक्सीजन कांट्रेक्टर डिलीवरी की डेट 20 मई को थी लेकिन एक रात पहले कंपनी वालों ने आर्डर कैंसिल कर दिया. कंपनी की वेबसाइड पर लिखा था कि 10 हजार से ऊपर का सामान लेने पर डिलीवरी चार्ज नहीं लगता है.

पीड़िता के मुताबिक हमसे भी 2000 डिलीवरी चार्ज लिए. यह सब होने के बाद हमने अमेरिकन कंपनी से कॅनटैक्ट किया जो इस कंपनी का अथोराइज्ड डीलर है. उसने हम वैसी ही मशीन 1 लाख 67 हजार में देने को राजी हो जिसमें टैक्स डिलीवरी चार्ज सब शामिल था. हम अब कुछ नहीं कर सकते थे. हमे समझ नहीं आ रहा था क्या होगा अब. फिर हमने  ऐसी कंपनी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया. और आपके चैनल के जरिए  मैं बताना चाहती हूं इस तरह की ठगी से बचने की कोशिश करें.

आप इस मामले पर कर सकते हैं इस तहत कार्यवाही

लखनऊ कंज़्यूमर कोर्ट के जज राजर्षि शुक्ला ने बताया कि आज के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, बैंकिंग ट्रांजक्शन फ्रॉड बहुत देखने को मिलते हैं. नए ऐक्ट के तहत इन सब चीजों को इसके दायरे में लाया गया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से ये पीड़ित महिला और बाकी जिन जिन का भी नुकसान हुआ है ऐसे में इसे ऑनलाइन फ्रॉड के तौर पर ही देखा जाएगा. कानून सिर्फ जान का मुआवजा देने तक ही नहीं सीमित है.

बल्कि इसमें पुलिस इन्वेस्टिगेशन भी होगी ताकि ऐसे लोगों पर तह तक जाकर कार्रवाई हो सके. इस बीमारी में जो अवसर तलाश कर रही हैं प्रथम दृष्टया ऐसी कंपनियां कम ही हैं. लेकिन इसपर कठोर कदम उठाए जाएंगे. इसमें आजीवन कारावास और सारे बैंकिंग ट्रांजेक्शन रद्द हो सकते हैं.

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