लखनऊ: उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल एक अहम फैसला लेते हुए प्रदेश के डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटा दिया है. मुकुल गोयल ने पिछले साल जुलाई में डीजीपी पद की कमान संभाली थी. महज 11 महीनो में ही उन्हें सरकार ने पद से हटा दिया है. मुकुल गोयल को सरकार ने अब सिविल डिफेंस का डीजी बनाया है. उन्हें पद से हटाए जाने के पीछे सरकार ने स्पष्ट वजह बताते हुए कहा कि पुलिस महानिदेशक मुकुल गोयल ने शासकीय और विभागीय कार्यों में कोई रुचि नहीं ली, सरकारी कामों की नजरअंदाजी कर रहे थे न ही प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर पर उनका खास ध्यान था.

इन विवादों के चलते सुर्ख़ियों में रहे मुकुल गोयल

दरअसल, पिछले साल से ही जब आईपीएस अफसर ने डीजीपी की कमान संभाली थी, तब से वे विवादों में घिर गए थे. सबसे पहले उत्तर प्रदेश के अखबारों में एक ज्वेलरी शोरूम के मालिक ने बड़े-बड़े इश्तेहार देकर मुकुल गोयल को डीजीपी बनने की बधाई दे डाली. इसके बाद विवाद शुरू हो गया. दूसरा विवादमुकुल गोयल के बतौर डीजीपी रहते लखनऊ के पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के साथ हुआ. पिछले साल 5 सितम्बर को बतौर डीजीपी मुकुल गोयल पूरे लाव लश्कर के साथ हजरतगंज थाने पहुंच गए, थाने का निरीक्षण किया और निरीक्षण के दौरान ही उन्होंने इंस्पेक्टर हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला को हटाने का आदेश दे दिया. उनके अचानक दिए गए इस फैसले पर पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर भी हैरान थे, क्योंकि इंस्पेक्टर हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला कई दिनों से डेंगू से ग्रसित थे, गंभीर हालत में अस्पताल में इलाज करवा रहे थे, मुकुल गोयल को इंस्पेक्टर के बीमार होने की बात बताई गई. जब यह मामला सूबे के मुखिया सीएम योगी तक पंहुचा तो उन्होंने आदेश दिया कि मुख्यमंत्री कार्यालय या किसी भी बड़े अफसर को किसी भी मातहत (किसी के अधीन काम करने वाला ) को हटाने या पोस्ट करने का आदेश नहीं देना है.

लखीमपुर में हालात बिगड़े लेकिन डीजीपी गायब

पिछले साल लखीमपुर के तिकुनिया में हुई हिंसा के बाद प्रदेश में कानून व्यवस्था बिगड़ने लगी. हालात इतने बिगड़ने लगे कि खुद एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार को मोर्चा संभालना पड़ा. उन्होंने 2 दिन तक लखीमपुर में खुद कैंप लगाया और वहा सुरक्षा व्यस्था का जायजा लिया। प्रदेश के कई जिलों में इसके बाद हिंसा हुई लेकिन डीजीपी मुकुल गोयल ना तो लखीमपुर गए और ना ही किसी अन्य जिले में पुलिसिंग करते नजर आए.

सरकार के बुलडोजर अभियान में नहीं दिखाई रुचि

सरकार का मानना है कि पूर्व डीजीपी मुकुल गोयल का रुख विधानसभा चुनाव के दौरान ठीक नहीं था. उन्हें शुरुआत से ही समाजवादी पार्टी के खेमे का अफसर माना जाता है. जब यूपी में अखिलेश यादव की सरकार थी तो लंबे समय तक मुकुल गोयल एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के पद पर रहे थे. जब विधानसभा चुनाव बीते तो प्रदेश में सरकार ने माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर अभियान तेज किया. लेकिन इस अभियान में भी मुकुल गोयल सक्रिय नहीं दिखे.

सुबह मीटिंग में शामिल हुए, शाम को पद से हुई छुट्टी

डीजीपी मुकुल गोयल से जुड़ा एक और विवाद है. दरअसल, लखनऊ जिले के पुलिस कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर के बीच जब विवाद हुआ तो पुलिस कमिश्नर से मुकुल गोयल ने जवाब तलब कर लिया था, इस मामले ने भी शासन में खूब तूल पकड़ा. वहीं सोमवार और मंगलवार को मुकुल गोयल छुट्टी लेकर दिल्ली भी गए थे. बुधवार सुबह मुख्यमंत्री की बैठक में डीजीपी के तौर पर मुकुल गोयल शामिल भी हुए थे, लेकिन अचानक देर शाम मुकुल गोयल को हटाने का आदेश दे दिया गया.

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