नई दिल्ली: नए साल की शुरूआत के साथ ही राजधानी दिल्ली से राजनीति के 20-20 की शुरूआत हो चुकी है. चुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए तारीखों का एलान कर दिया है. दिल्ली में शनिवार 8 फरवरी को वोटिंग होगी जबकि मंगलवार 11 फरवरी को नतीजे घोषित होंगे. दिल्ली में मुख्य तौर पर तीन बड़ी पार्टियां चुनावी मैदान में है. पहली सीएम अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी जिसने 2015 विधानसभा चुनावों में 70 में से 67 सीटों के साथ धमाकेदार आगाज किया था. आम आदमी पार्टी ने बीजेपी और महज तीन सीटों पर समेट दिया था और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुलने दिया था.

सर्वे एजेंसी सीएसडीएस- लोकनीति ने पिछले चुनाव बाद सर्वे किया था कि आखिर किस तबके ने किसे वोट दिया. सर्वे में पता चला कि दिल्ली में रहने वाले गरीब तबके में से 66 फीसदी वोट आप को गया, 22 फीसदी बीजेपी को और महज 9 फीसदी कांग्रेस को वोट मिले. इसके बाद लोअर मिडिल क्लॉस की बारी आती है जिसमें 57 फीसदी लोगों ने आप को वोट किया जबकि 29 फीसदी ने बीजेपी को और 10 फीसदी ने कांग्रेस को वोट किया था.

दिल्ली में रहने वाली बड़ी आबादी मिडिल क्लॉस की है और सर्वे का रिजल्ट बताता है कि मिडिल क्लॉस में से 51 फीसदी ने आप को वोट किया, 35 फीसदी ने बीजेपी को और महज 13 फीसदी ने कांग्रेस को वोट डाला था. सर्वे के मुताबिक राजधानी में रहने वाले अपर क्लॉस में से 47 फीसदी ने आप सरकार के लिए वोट दिया जबकि 43 फीसदी अमीर तबके ने बीजेपी और 6 फीसदी लोगों ने कांग्रेस का समर्थन किया.

आर्थिक आधार पर बांटे गए इस सर्वे से एक बात जो साफ तौर पर नजर आती है वो ये कि गरीब, मिडिल क्लॉस और लोअर मिडिल क्लॉस ने आप का साथ दिया जबकि अपर क्लॉस ने बीजेपी और आप को लगभग बराबर वोट दिए. बीजेपी और कांग्रेस के लिए इस बार लोअर और मिडिल क्लॉस के वोट को अपने पक्ष में लाने की बड़ी चुनौती होगी. खास तौर पर तब जब दिल्ली सरकार ने दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जबर्रदस्त काम किया है जिसका सबसे ज्यादा फायदा गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को ही हो रहा है. इसके अलावा आप सरकार में गरीब और लोअर मिडिल क्लॉस का बिजली और पानी का बिल लगभग खत्म हो चुका है.

बीजेपी के लिए तो स्थिति और भी मुश्किल नजर आती है. केंद्र में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने वाली बीजेपी के पास दिल्ली में कोई सीएम पद का चेहरा नहीं है. ऊपर से एनआरसी और सीएबी ने बीजेपी की हालत एक तो कोढ़ ऊपर से खुजली जैसी कर दी है. बहरहाल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पार्टी में चुनाव स्पेशलिस्ट माना जाता है. देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी दिल्ली फतह के लिए कौन सा फॉर्मूला निकालकर लाती है.

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