नई दिल्लीः लोगों को शनि की दृष्टि से बचाने वाले दाती महाराज पर शनि के साथ साथ कानून की नजरें भी टेढ़ी होती जा रही हैं. अब तक हुई जांच में चार बातों का खुलासा हुआ है जो बेहद चौंकाने वाली हैं. जिसमें आश्रम की लड़कियों के जाने रिकॉर्ड उनके पते और अनाथ बच्चियों से जुड़ी जानकारियों में भारी गड़बड़ी मिली है. हाइकोर्ट द्वारा सख्ती किए जाने के बाद दाती महाराज की गिरफ्तारी की बात भी सामने आ चुकी है. राजस्थान की राज्य महिला आयोग को दाती महाराज के खिलाफ हुई जांच में भारी गड़बड़ मिली है. जो उनके आश्रम की गतिविधियों को संदिग्ध बता रही है.

हिन्दी समाचार पत्र दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका को कोर्ट ने क्रिमिनल रिट पिटीशन में बदल कर क्रिमिनल बैंच के पास भेज दिया है. अब इस मामले पर 11 जुलाई को सुनवाई होगी. दिल्ली हाईकोर्ट के इस कदम के बाद माना जा रहा है कि दाती महाराज की गिरफ्तारी भी सुनवाई के बाद हो सकती है. क्योंकि इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के एक महीने बाद भी दाती महाराज की गिरफ्तारी न होने पर कोर्ट ने पुलिस को आड़े हाथों लिया था.

ये हैं चार खुलासे जो दाती महाराज के आश्रम की जांच के बाद सामने आए हैं.

1.लड़कियों के आश्रम से जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं.
दाती महाराज के राजस्थान स्थित पाली के आलवास गांव आश्रम में राज्य महिला आयोग ने दौरा किया था. जिसमें महिला आयोग ने जो रिपोर्ट तैयार की थी उसमें आश्रम में चल रही गड़बड़ियों को क्रमबार बताया गया है. जिसमें सबसे चौंकाने वाला खुलासा ये हुआ है कि छुट्टियों के दिनों में लड़कियों को आश्रम के हॉस्टल से ले जाने वाले और उनको वापस छोड़ कर जाने वाले लोगों द्वारा दर्ज किए गए नाम पते गलत निकले हैं.

2. लड़कियों के घरों के पतों का गलत रिकॉर्ड
महिला आयोग की रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि बहुत सी ऐसी लड़कियां है जिनके एडमिशन फॉर्म में उनके अभिभावकों और संरक्षकों के नाम और पते गलत दर्ज किए गए हैं. ऐसे में इस बात का पता करना मुश्किल हो रहा है कि ये लड़कियां कहां से और कब लाई गई हैं.

3. आश्रम की अनाथ बच्चियों का नहीं मिला कोई रिकॉर्ड
महिला आयोग की टीम ने जिस दिन दाती महाराज के आश्रम का निरिक्षण किया था उस वक्त टीम को आश्रम में लगभग 50 अनाथ बच्चियां मिली थीं. इनमें से ज्यादातर बच्चियों को उदयपुर के कोटड़ा से लाया गया था. आयोग ने इस बात पर बड़ी हैरानी जताई थी कि इन अनाथ बच्चियों का कोई भी रिकॉर्ड आश्रम में नहीं मिला है.

4. आश्रम में बताई गई संख्या से ज्यादा लड़कियां मिलीं.
महिला आयोग की टीम को निरीक्षण के वक्त पता लगा कि वहां प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल और इसके साथ एक कॉलेज का संचालन भी किया जा रहा था. टीम को जानकारी दी गई थी कि वहां 153 लड़कियां पढ़ती हैं जबकि गिनती करने पर टीम को 253 लड़कियां मिली.

टीम ने जब इन लड़कियों के कागजातों की जांच की तो ज्यादातर लड़कियों के नाम और पते या तो अधूरे थे या गलत थे. इसमें सबसे बड़ी हैरानी की बात ये थी की किसी भी लड़की का स्कूल या कॉलेज द्वारा जारी किया गया एनरोलमेंट रिकॉर्ड मौजूद नहीं था. जब महिला आयोग ने इन कागजातों की मांग की तो उनको कुछ नहीं मिला.

 

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