नई दिल्ली. करवा चौथ जा चूका है, लेकिन फिर भी डाबर के करवा चौथ के विज्ञापन ( Dabur Lesbian Advt ) पर विवाद अभी भी जारी है. विज्ञापन पर हुए विवाद के बाद डाबर ने यह विज्ञापन ही हटा दिया है. विज्ञापन में एक समलैंगिक जोड़े को करवा चौथ मनाते हुए देखा जा सकता है, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर बावला मच गया. लोगों का कहना है कि इस विज्ञापन में हिन्दू धर्म का मज़ाक बनाया गया है.

आखिर क्यों हुआ विवाद

डाबर के करवा चौथ के मौके पर एक ख़ास विज्ञापन रिलीज़ किया, जिसमें दो महिलाओं को करवा चौथ मनाते हुए देखा जा रहा है. यह एक समलैंगिक जोड़ा है. इसमें एक महिला ने दूसरे महिला के लिए करवा चौथ व्रत रखा है. इसी बात को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल खड़ा हो गया. लोगों का कहना है कि इस तरह के विज्ञापनों से भारतीय संस्कृति का मज़ाक बनाया जा रहा है. हिन्दू रिवाज़ों और धर्म के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. लोगों द्वारा हो रहे विरोध के चलते डाबर ने यह विज्ञापन वापस ले लिया है.

डाबर ने विज्ञापन वापस लेते हुए क्या कहा

विज्ञापन पर हो रहे विरोध के चलते डाबर ने कुछ ही दिनों में विज्ञापन वापस ले लिया. डाबर ने विज्ञापन वापस लेते हुए लिखा कि, ‘कम्पनी का करवाचौथ विज्ञापन हर सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हटा दिया गया है. लोगों की भावनाओं को आहत करने के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं.’

पहले भी इन विज्ञापनों पर हो चूका बवाल

बीते दिनों फैब इंडिया ने दिवाली के मौके पर एक विज्ञापन जारी किया था, जिसमें कम्पनी ने ‘जश्न-ए-रिवाज़’ टैगलाइन रखी थी, इस लाइन पर भी सोशल मीडिया पर काफी बखेड़ा खड़ा हुआ था, जिसके बाद कम्पनी ने यह विज्ञापन वापस लिया था. इतना ही नहीं, पीसी ज्वेलर्स, सिएट टायर्स, मान्यवर और तनिष्क के विज्ञापनों पर भी धार्मिक एकता के आधार पर विवाद हो चूका है.

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