नई दिल्ली: कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए सभी कपंनियां तेजी से कार्य कर रही हैं। हाल ही में एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड के साथ में मिलकर कोरोना वैक्सीन- कोवीशील्ड पर चल रहे अंतिम ट्रायल्स के अच्छे नतीजे आ गए हैं। वैक्सीन ट्रायल के पहले चरण में 62 प्रतिशत इफिकेसी तो दूसरे चरण में 90 प्रतिशत से ज्यादा सफल साबित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना हैं कि भारत के लिए उपलब्धि समान हैं क्योंकि वैक्सीन आते ही भारत में कोरोना को रोका जा सकेगा।

 

कोवीशील्ड वैक्सीन से जुड़ी जरुरी बात

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी व वैक्सीटेक मिलकर कोरोना वैक्सीन बनाने पर काम कर रही हैं। वैक्सीन का नाम कोवीशील्ड या एजेडडी1222 रखा गया हैं। जानकारी के लिए बता दें कि दवा के चरण का प्रयोग चिंपाजी पर किया गया। यानि की चिम्पनाजी में ठंड की वजह से उत्पन्न होने वाले एडेनोवायरस को कमजोर कर उपयोग में लिया गया हैं। वहीं ऑक्साफोर्ड में वैक्सीन के लिए कार्यरत विशेषज्ञों की मानें तो सार्स कोविड-2 का जेनेटिक मटेरियल हैं। जो कि वैक्सीनेशन के जरिए सबसे पहले सरफेस स्पाइक प्रोटिन बना लेता हैं और बाद में सार्स कोविड-2 के खिलाफ इम्युन सिस्टम बनाने का कार्य करता हैं। यदि आपके इम्युन स्ट्रांग होगा तो आप भविष्य में वापस कोरोना वायरस के हमले को जवाब देगा।

 

ब्राजील और यूके का वैक्सीनेशन ट्रायल

कोवीशील्ड बनाने की जुगत में पूरी दुनिया जुटी हैं। बात यदि यूके और ब्राजील में किए जा रहें कोवीशील्ड के ट्रायल की हो तो। ब्राजील कोरोना वैक्सीन का ट्रायल 10300 वॉलेंटियर्स पर कर रहा हैं। इन सभी वॉलेंटिर्स को दो फुल डोज दिए गए। तथा रिजल्ट में देखा गया की किसी भी वॉलेंटियर्स को कोई गंभीर बिमारी नहीं हुई। यूके में हाल ही में 12390 वॉलेंटियर्स पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल किया गया। इन सभी वॉलेंटियर्स को कुल 2 डोज दिए गए। सबसे पहले हॉफ डोज दिया ताकि वैक्सीन का असर देखा जा सकें। बाद में फुल डोज दिया गया। इस प्रकार यूके वैक्सीन के ट्रायल में आगे दिख रहा हैं।

जब वॉलेंटियर्स को हॉफ डोज दिया तो इफिकेसी 90 प्रतिशत देखने को मिली। वहीं पूरा डोज देने पर यह इफिकेसी 62 प्रतिशत रही। इस प्रकार दोनो डोज की मिलाकर इफिकेसी देखी जाए तों 70 प्रतिशत रही। इससे पता चलता हैं कि वैक्सीन का ट्रायल अच्छा चल रहा हैं। जानकारी के लिए बता दें कि वॉलेंटियर्स को वैक्सीन देने के 1 साल बाद तक उनके समय-समय पर ब्लड सैम्पल से लेकर इंफेक्शन की जांच की जाएगी। ताकि उनके पर वैक्सीन के उपयोग से क्या प्रभाव पड़ रहा पता लगया जा सकें।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में वैक्सीन ट्रायल के चीफ एंड्रयू पोलार्ड ने कहा कि हम वैक्सीन ट्रायल में किसी प्रकार की कोई खामी नहीं छोड़ रहे हैं। हाल ही में हमनें एक रेजिमेन से 90 प्रतिशत इफिकेसी हासिल की हैं। इससे पता लगाया जा सकता हैं कि वैक्सीन का ट्रायल सफलतम मिल रहा हैं। वहीं यदि हम सही इफिकेसी को फॉलो करते रहें तो हमें बेहतर नतीजे मिलेगें।

 

वैक्सीन ट्रायल पर देश-दुनिया का हाल

भारत में वैक्सीन पर काम के लिए ऑक्सफोर्ड ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मैन्युफैक्चरिंग कॉन्ट्रेक्ट किया हैं। वहीं वैक्सीन के 2 ट्रायल तो सफल साबित हुए इसलिए हाल में 3 ट्रायल चल रहा हैं। वैक्सीन के 3 ट्रायल सफल साबित होने के साथ नतीजे 2021 जनवरी-फरवरी में आपके समक्ष होगें।

नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन के चैयरमेन विनोद पॉल ने सुखद खबर सूनाई हैं। उनका कहना हैं कि यदि एस्ट्राजेनेका को यूके में इमरजेंसी अप्रूवल मिल जाता हैं तो भारत में चल रहें वैक्सीनेशन 3 ट्रायल को पूरा होने से पहले ही कोवीशील्ड को मंजूरी मिल जाएगी। जिसका सीधा फायदा भारतीय जनता को मिलेगा।

वहीं पॉल ने कहा कि एस्ट्राजेनेका को यूके में इमरजेंसी अप्रूवल मिलने के साथ सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से कोवीशील्ड को अनुमति मिलना जरुरी हैं। इसके बाद ही वैक्सीनेशन लगाने का कार्य प्रायरिटी ग्रुप पर शुरु हो पाएगा।

 

कोवीशील्ड को लेकर सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की तैयारी –

एसएसआई एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुरेश जाधव ने कांफ्रेस में कोवीशील्ड पर खुल कर बात की। उन्होंने कहा कि वैक्सीन पर सभी अप्रूवल मिलने के साथ ही जनवरी से 5-6 करोड़ वैक्सीन बनने लगेगी। साथ ही जनवरी तक हम कोवीशील्ड वैक्सीन के 8 से 10 करोड़ डोज का स्टॉक पूर्ण से तैयार कर लेगें। बस वैक्सीनेशन का तीसरा चरण पूरा होने में कुछ समय बाकी हैं।

 

कोवीशील्ड स्टोर करने पर क्या कहां

कोवीशील्ड को स्टोर करने में ज्यादा समस्या नहीं आएगी। इसे 2 से 8 डिग्री तक के तापमान पर करीब 6 महीनों के लिए स्टोर किया जा सकता हैं। जबकी फाइजर व मॉडर्ना की वैक्सीन को फ्रिजर उपयोग की ज्यादा जरुरत पड़ेगी। इस प्रकार वैक्सीन को स्टोर करने के लिए हेल्थकेयर सिस्टम में ज्यादा बदलाव की जरुरत नही हैं। बस कुछ सेफ्टी ऱखने के लिए सिस्टम बदलना पड़ सकता हैं। दूसरी ओर एस्ट्राजेनेका के सीईओ पास्कल ने कहा की नॉ प्रोफिट कमिटमेंट वैक्सीन बनाने के उद्देश्य को मजबूती देगा साथ ही वैक्सीन दुनिया में जल्द से जल्द मिल पाएगी।

 

भारत के अलावा कहां चल रहा वैक्सीनेशन ट्रायल –

भारत के साथ ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, जापान, रुस, केन्या व लेटिन में भी वैक्सीनेशन ट्रायल चल रहे हैं। सभी वैक्सीन जल्द से जल्द बनाना चाहतें हैं ताकि जनता को कोरोना के कहर से उभारा जा सकें। वहीं 60 हजार वॉलेंटियर्स पर वैक्सीन का ट्रायल चल रहा हैं। सभी वैक्सीन या तो दूसरे या अंतिम फेज में पहुंच चुकी हैं। वहीं एस्ट्राजेनेका सरकारों, मल्टीलेटरल ऑर्गेनाइजेशंस के साथ मिलकर वैक्सीन बनाने पर काम कर रही हैं। इसी के साथ एस्ट्राजेनेका का सफलतम रिकार्ड भी काफी अच्छा हैं। वैक्सीन बनाने वाले सभी कंपनियों का एक एजेंडा हैं कि लोगो को महामारी के प्रकोप से बचाया जा सकें। साथ ही वैक्सीनेशन के जरिए जानें बचाई जा सकें।

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