नई दिल्ली: मां का दूध जैसे बच्चों को हर बीमारी से बचाता है वैसे ही मां का दूध अब कोरोना मरीजों की भी जान बचाएगा. एक रिसर्च में कोरोना को मात दे चुकी माओं के दूध में कोरोना वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी पाई गई है. डच वैज्ञानिकों की योजना है कि प्लाज्मा थेरेपी की तरह मां के दूध का इस्तेमाल कर कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों में वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा पैदा की जाए जिससे उनकी जान बच सके.

वैज्ञानिकों का कहना है कि क्रमित मां के दूध के आइस क्यूब या बर्फ के टुकड़े बनाकर अगर मरीजों को चूसने के लिए दिए जाए तो उनमें ज्यादा एंटीबॉडी बनेगी. डच ब्रेस्ट मिल्स बैंक के प्रमुख और साइंटिस्ट व्रिट सैम के मुताबिक कोरोना संक्रमित मां जो ठीक हो चुकी है उनके दूध की आइस क्यूब को चूसने से मरीजों के शरीर में मौजूद सभी म्यूकस मेंबरेंस में एंटीबॉडी पहुंच जाएगी. वैज्ञानिकों का मानना है कि म्यूकस एक मोटी परत होती है जो शरीर के श्वसन तंत्र व अन्य हिस्सों को बाहरी रोगाणुओं के प्रवेश से रोकती है. जब इसमें एंटीबॉडी प्रोटीन मिश्रित हो जाएंगी तो कोरोना वायरस के स्पाइक शरीर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे.

ब्रिट वैन कुलेन का कहना है कि इन आइस क्यूब को उन बुजुर्गों को देने से लाभ होगा जो होम आइसोलेशन में रहकर कोरोना वायरस का इलाज करा रहे हैं. इसके अलावा उन मरीजों को भी इसका काफी फायदा पहुंचेगा जो वायरस के रिस्क ग्रुप में आते हैं. शोधकर्ताओं ने लैब टेस्ट में 30 संक्रमित हो चुकी शिशुवती महिलाओं के दूध में कोरोना वायरस की एंटीबॉडी पायी. वैज्ञानिकों के मुताबिक ये एंटीबॉडी इतनी शक्तिशाली हैं कि इससे स्वस्थ व संक्रमित लोगों के शरीर में वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा पैदा की जा सकती है. डच में वैज्ञानिकों ने अपील की है कि स्वस्थ व पॉजिटिव हो चुकीं शिशुवती महिलाएं सौ-सौ मिलीग्राम अपना दूध दान करें ताकि दूध के महत्व पर और ज्यादा अनुसंधान हो सके. इस मामले में पांच हजार महिलाएं आगे आई हैं.

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