नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण ने भले ही आज दुनिया को हिला रखा हो लेकिन दुनिया को इसका असर कई सालों तक देखने को मिलेगा. खास तौर पर गरीब और मध्यम वर्ग पर कई सालों तक कोरोना की मार पड़ने वाली है. सभवत: आने वाले दिनों में कोरोना के मुकाबले दुनियाभर में गरीबी और भुखमरी से कहीं ज्यादा मौत होगी. क्योंकि भारत में असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की संख्या कहीं ज्यादा है, ऐसे में भारत में बड़ी संख्या में भुखमरी की आशंका जताई गई है. अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन के मुताबिक कोरोना संक्रमण की वजह से भारत में अंसगठित क्षेत्रों में काम करने वाले करीब 40 करोड़ लोग गरीबी और भुखमरी के शिकार होने की संभावना है. यही नहीं अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन के मुताबिक 2020 की दूसरी तिमाही में देशभर में करीब 19 करोड़ लोगों की नौकरियां जाएगी.

आईओएल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद कोरोना दुनिया के सामने सबसे बड़ी मुसीबत बनकर आई है. आईएलओ के डायरेक्टर गाय रायडर के मुताबिक मंदी का दौर विकसित और विकासशील दोनों देशों में एकसमान देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि वैश्विक महामंदी को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयासों की जरूरत है और अगर वो नहीं लिए गए तो दुनियाभर में महामंदी आएगी. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पूरी दुनिया में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करीब दो अरब लोग हैं जिनके सामने कोरोना के बाद जीविका की समस्या पैदा हो जाएगी.

आईएलओ की रिपोर्ट में जिन देशों का नाम खास तौर पर लिया गया है उनमें भारत का भी नाम शामिल है. रिपोर्ट में कहा गया है कोरोना के चलते लॉकडाउन की वजह से भारत, नाईजीरिया, ब्राजील जैसे देशों में असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की हालत बेहद खराब और चिंताजनक होने वाली है. रिपोर्ट में भारत को लेकर कहा गया है कि भारत की 90 फीसदी आबादी अंसगठित क्षेत्र से जुड़ी हुई है और ऐसे में इनमें से करीब 40 करोड़ लोगों को गरीबी और बेरोजगारी का सामना करना पड़ सकता है.

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