नई दिल्लीः कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर गुजरात की एक सरकारी कंपनी गुजरात स्टेट पेट्रोलियम  कॉर्पोरेशन (GSP) में हुए कथित घोटाले को छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसा कर सरकार ने आरबीआई की साख गिराई है. सोमवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की थी जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर ये आरोप लगाया कि दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुकी जीएसपीसी को दिवालिया घोषित होने से बचाने के लिए पीएम मोदी की केंद्र सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सर्कुलर का विरोध किया है.

प्रेस कांफ्रेंस में जयराम रमेश ने कहा कि देश में नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी के बाद आरबीआई पर ये दूसरी बड़ी चोट की गई है. जो उसका एक तरह से अंतिम संस्कार करने के बराबर है. उन्होंने कहा, गुजरात की सरकारी कंपनी जीएसपीसी के लोन को कम करने की खातिर केंद्र सरकार ने भारत की नवरत्न कंपनियों में एक ओएनजीसी को भी खासा नुकसान पहुंचाया है. जिसपर ओएनजीसी बोर्ड की तरफ से असहमति जताई गई थी लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी औऱ पैट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के दबाव के चलते ओएनजीसी को 8 हजार करोड़ में जीएसपीसी से गैस का भंडार खरीदा था.

जयराम ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंको से कर्ज की धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए 12 फरवरी 2018 को एक सर्कूलर जारी किया था जिसमें इस बात का जिक्र किया गया था कि जिन कंपनियों ने 2 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज लिया हुआ है उन कंपनियों ने अगर 1 मार्च 2018 तक अपनी कर्ज की रकम का भुगतान नहीं किया तो उसके 180 दिनों के भीतर ही बैंक उन्हें दिवाला कानून के तहत दिवालिआ घोषित करे.

कांग्रेस नेता ने कहा, लेकिन रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए इस सर्कूलर को चुनौती देने के लिए इस सर्कूलर के खिलाफ जीएसपीसी से ठेका लेने वाली कई निजी कंपनियों ने अडाणी पॉवर के साथ केंद्र सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. इस याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि वह रिजर्व बैंक के इस सर्कूलर से सहमत नहीं हैं और इस 180 दिन की समय सीमा को 360 दिन का किया जाना चाहिए.

इसके अलावा जयराम रमेश ने प्रेस कांफ्रेंस में बीजेपी पर एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि 2005 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक घोषणा की थी जिसमें केजी बेसिन में मिले तेल भंडार का नाम दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रखा जाना था. और उन्ही दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर 2 हजार करोड़ का घोटाला किया गया.

उन्होंने कहा कि इस घोटालने का खुलासा गुजरात विधानसभा में पेश सीएजी की रिपोर्ट से हुआ था. जो सीएजी ने 31 मार्च 2015 को सदन के पटल पर रखी थी. जिसके बाद इस मामले में दूसरी रिपोर्ट को पेश किया गया था. उस सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया था कि जीएसपीसी ने 15 बैंकों से 2 हजार करोड़ का लोन लिया था और इस लोन की राशि में सबसे ज्यादा हिस्सा भारतीय स्टेट बैंक का था.

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