नई दिल्ली. देश के कई राज्यों के बोर्ड ने अपनी 10वीं 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। इसी के साथ ही कई राज्यों ने बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम तैयार करने का फॉर्मूला भी घोषित कर दिया है। जिसके बाद छात्र नतीजों का इंतेज़ार कर रहे हैं। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने सभी स्टेट बोर्ड्स को आदेश दिया कि 31 जुलाई से पहले नतीजे घोषित कर दिए जाएं।

इसके साथ ही सीबीएसई और आईसीएसई की तरह निर्दिष्ट समयरेखा बनाने को कहा है। यानी 4 जुलाई के आस-पास सभी राज्य के शिक्षा बोर्डाें द्वारा कक्षा 12वीं के छात्रों का परिणाम घोषित करने के लिए तैयार की गई मूल्यांकन नीति का विवरण जारी कर दिया जाएगा।

वहीं, इम्तिहान के कार्यक्रम में एकरूपता लाने के लिए दायर याचिका पर कोई निर्देश जारी करने से साफ इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य और उनके बोर्ड अपनी नीति बनाने को स्वतंत्र और स्वायत्त हैं। लिहाज़ा उनके अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं देंगे।

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने आंध्र प्रदेश सरकार से पूछा कि आपने जुलाई के आखिरी हफ्ते में इम्तिहान आयोजित करने की बात कही है। अव्वल तो स्थिति अनिश्चित है, आपने इम्तिहान करा भी लिया तो नतीजे कब तक दे पाएंगे? देश-विदेश के विश्वविद्यालय आपके नतीजों का इंतजार करेंगे क्या?

कोर्ट ने आगे कहा कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार से ये भी पूछा कि इम्तिहान के दौरान पर्यवेक्षक शिक्षक, सहायक कर्मचारी भी परीक्षा कक्ष में रहेंगे, आप सभी के लिए हवा और रौशनी का इन्तेजाम कैसे करेंगे।

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