नई दिल्ली/ सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस एनवी रमन्ना आज देश के 48वें मुख्य न्यायधीश पद की शपथ ली है। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में जस्टिस रमन्ना को मुख्य न्यायधीश की शपथ दिलाई है। रमन्ना आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के पहले ऐसे जज है, को मुख्य न्यायधीश बने है। बता दें कि जस्टिस एनवी रमना का पूरा नाम नथालपति वेंकट रमना है। एक किसान परिवार से आने वाले जस्टिस एनवी रमन्ना ने कानून की दुनिया में लंबा अनुभव कठिन संघर्ष के बाद ये मुकाम हासिल किया है। वो करीब 38 साल से कानून और न्याय के क्षेत्र में अलग-अलग भूमिका निभाते रहे हैं।

किसान परिवार में हुआ एनवी रमन्ना का जन्म

एनवी रमन्ना का जन्म 27 अगस्त 1957को आंध्र प्रदेश की कृष्ण जिले के पोन्नावरम गांव के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने बैचलर ऑफ लॉ और बैचलर ऑफ साइंस की पढ़ाई की है। जज बनने की दुनिया में उन्होंने अपना पहला कदम 10 फरवरी 1983 में रखा था जब उन्होंने एडवोकेट के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाया था। वो आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट, सेंट्रल और आंध्र प्रदेश एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस कर चुके हैं। 27 जून 2000 को जस्टिस रमन्ना आंध प्रदेश हाईकोर्ट के स्थायी जज के तौर पर नियुक्त हुए। रमन्ना को संवैधानिक, आपराधिक और इंटर-स्टेट नदी जल बंटवारे के कानूनों का खास जानकार माना जाता है।

परिवार में कौन-कौन हैं ?

जस्टिस रमन्ना के परिवार में उनकी पत्नी एन शिवमाला और दो बेटियां डॉक्टर एनएस भुवना और एनएस तनुजा हैं। तीन साल पहले यानी 31 मार्च, 2018 को उन्होंने अपनी संपत्ति का जो ब्योरा दिया था, उसके मुताबिक उन पर 30 लाख रुपये की देनदारी थी। इसके अलावा उनके और उनके परिवार के पास हैदराबाद और नोएडा समेत आंध्र प्रदेश में कुछ प्लॉट के अलावा खेती की पुश्तैनी जमीन समेत कुछ और अलग कृषि जमीन भी थी।

चीफ जस्टिस बोबडे के बाद सबसे वरिष्ठ जज रमन्ना हैं

27 जून 2000 को उनकी नियुक्ति आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के स्थाई जज के तौर पर की गई थी। 10 मार्च 2013 से 20 मई 2013 के बीच वो आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के ऐक्टिंग चीफ जस्टिस रह चुके है। एनवी रमन्ना कानूनी महत्त्व के कई विषयों पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा ले चुके हैं। 2 सितंबर 2013 को उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था। करीब 6 महीने बाद ही यानी 17 फरवरी 2014 को उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर की गई। इस समय वो सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस एसए बोबडे के बाद सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। इसलिए उन्हें देश के अगले चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है।

कई अहम फैसले दे चुके हैं जस्टिस रमन्ना

जस्टिस रमन्ना सुप्रीम कोर्ट के उस बेंच में शामिल थे, जिसने जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट के निलंबन पर तत्काल समीक्षा करने का फैसला सुनाया था। वो उस ऐतिहासिक बेंच में भी शामिल रहे हैं, जिसने देश के मुख्य न्यायाधीश के दफ्तर को राइट टू इंफॉर्मेशन ऐक्ट (आरटीआई) के दायरे में लाया। देश में उच्च न्यायपालिका के सदस्यों की बहाली की प्रक्रिया के मुताबिक, ‘सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस सबसे वरिष्ठ जज को बनाया जाना चाहिए जो इस पद पर नियुक्त होने के लिए फिट हो।’ जस्टिस रमन्ना नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन भी हैं।

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