नई दिल्ली. हैदराबाद में गैंगरेप के आरोपियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया. इस खबर पर नेता, अभिनेता, आम लोगों ने खुशी जाहिर की और इसे न्याय बताया. लेकिन देश के शीर्ष न्यायालय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े ने इस एनकाउंटर की आलोचना करते हुए कहा है बदले की भावना से कभी न्याय नहीं होता. जोधपुर में एक कार्यक्रम में सीजेआई ने कहा, न्याय कभी भी आनन-फानन में नहीं किया जाना चाहिए. अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो अपना मूल चरित्र खो देता है. जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग के उद्घाटन समारोह में जस्टिस एस ए बोबड़े ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो ये अपना मूल स्वरूप खो देता है.’ इस कार्यक्रम में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी मौजूद थे.

बता दें कि हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर से गैंगरेप के बाद उसे जिंदा जला दिया गया था. इस घटना के बाद पूरे देश में लोग सड़कों पर आ गए थे. देश में लगातार गैंगरेप और पीड़िता को मारने की घटनाएं सामने आ रही हैं. इससे लोगों में काफी गुस्सा था. हैदराबाद पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था और रिमांड में लेकर पूछताछ कर रही थी. 6 दिसंबर की सुबह पुलिस आरोपियों को घटनास्थल पर लेकर गई अपराध का सीन रिक्रियेट करने के लिए. इसी दौरान पुलिस के अनुसार आरोपियों ने हथियार छीनकर पुलिस पर फायरिंग करनी शुरू कर दी. पुलिस की जवाबी फायरिंग में चारों आरोपी मारे गए. पुलिस की इस थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं लेकिन आम लोगों ने फूल बरसाकर पुलिस का स्वागत किया.

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- हैदराबाद की तरह हो न्याय

हैदराबाद पुलिस ने एंकाउंटर में रेप के चारों आरोपियों को मार गिराया यह खबर मिलते ही सोशल मीडिया पर लोग खुशी का इजहार करने लगे. हैदराबाद पुलिस की वाहवाही पूरे देश में होने लगी. क्या नेता क्या अभिनेता क्या आम आदमी सभी एक सुर में इस एंकाउंटर को न्याय ठहराने लगे. एक दिन पहले जो पुलिस खलनायक लग रही थी एक ही दिन में लोगों के  लिए हीरो हो गई. फिल्मी स्टाइल में हुए इस एंकाउंटर से त्वरित न्याय जैसा प्रतीत जरूर होता है लेकिन यह कानून-व्यवस्था के इकबाल के लिए बड़ा प्रश्नचिन्ह भी खड़ा करता है. 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप के आरोपियों को अभी तक फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सका है. ऐसे में लोगों का हैदराबाद पुलिस की तरह न्याय मांगना देश की न्यायपालिका के प्रति घटते विश्वास को भी प्रकट करता है. 

CJI ने क्यों कहा कि यह न्याय नहीं है

हैदराबाद के चारों आरोपियों को एंकाउंटर में मार गिराना भारत की ढ़हती कानून व्यवस्था का सिंबल है. जोधपुर में एक कार्यक्रम में देश के सीजेआई अरविंद बोबड़े ने कहा कि न्याय कभी बदले की भावना के तहत नहीं होता है. उन्होंने एंकाउंटर पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आनन-फानन में उठाया गया कदम कभी न्याय तक नहीं पहुंचता. गौरतलब है कि कानून ने इन चारों आरोपियों को अभी दोषी नहीं ठहराया था. ऐसे में सवाल तो यह भी उठ रहे हैं कि कहीं हैदराबाद पुलिस ने अभूतपूर्व दबाव के बीच यह कदम तो नहीं उठाया है. वहीं अदालतों में लंबी प्रक्रिया से त्वरित न्याय की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं. जरूरत है अदालतों और न्याय व्यवस्था को चाक-चौबंद होने और जल्द फैसला करने की. बंदूक की नलियों से न्याय नहीं मौत निकलती है. यह याद रखना जरूरी है. 

देखें चीफ जस्टिस ने क्या कहा

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