नई दिल्ली: गलवान घाटी में चीन के साथ जारी सीमा विवाद और 20 जवानों की शहादत के बाद सरकार ने चीन को आर्थिक मोर्चे पर पटकने के लिए सोमवार को 59 चीनी मोबाइल एप को भारत में बैन करने का फैसला लिया जिसमें टिक-टॉक और शेयर इट जैसे ऐप भी शामिल हैं. सरकार के इस फैसले की चारों तरफ तारीफ हो रही है. सोशल मीडिया पर लोग जमकर मोदी सरकार के इस फैसले की तारीफ कर रहे हैं लेकिन क्या वाकेई सरकार ने चीनी कंपनियों को आर्थिक झटका देने के लिए ईमानदारी से कदम उठाया है? ऐसा इसलिए क्योंकि चीनी निवेश वाली कई कंपनियां अब भी मौजूद हैं जो भारत से अरबों की कमाई कर रही हैं.

हम आपको एक एक कर उन कंपनियों की जानकारी देते हैं जिनमें चीनी कंपनियों का बड़ा निवेश है. पहला नाम है बिग बॉस्केट जिसमें चीन के अलीबाबा ग्रुप का पैसा लगा हुआ है. बिग बॉस्केट भारत से 1.1 बिलियन डॉलर की कमाई कर चुका है. इशके अलावा बायजूस जिसमें टेनसेंट होल्डिंग का पैसा लगा है. बायजूस ने 1.4 बिलियन डॉलर की कमाई की है.

चीनी कंपनी के निवेश वाली ड्रीम 11 जिसने 934.6 मिलियन की कमाई की है. हाइक जिसमें सीट्रिप कंपनी का पैसा लगा है उसने 261 मिलियन डॉलर की कमाई की है. फ्लिपकार्ट जिसमें स्टीट्यू कैपिटल का पैसा लगा हुआ है और उसने भारत से 7.7 बिलियन डॉलर की कमाई की है. मेक माय ट्रिप जिसमें टेनसेंट होल्डिंग का पैसा लगा है और ये कंपनी भी भारत में जमकर पैसा कमा रही है.

ओला, ओयो, पेटीएम, पेटीएम मॉल, पॉलिसी बाजार, क्विकर, रिविगो, स्नैपडील, स्विगी, उड़ान, जोमैटो.. ये सब वो कंपनियां हैं जिनमें चीनी कंपनियों का पैसा लगा है और वो भी ऐसा कंपनियां जो दुनियाभर में ब्लैकलिस्ट हो चुकी हैं. सवाल ये है कि जब सरकार ने 59 चीनी ऐप को बैन किया तो इन कंपनियों को बैन क्यों नहीं किया? सिर्फ इसलिए क्योंकि ये प्रत्यक्ष निवेश नहीं हैं? लेकिन अप्रत्यक्ष निवेश का क्या जो इन कंपनियों में बड़ी मात्रा में लगा है और जिनकी कमाई का बड़ा हिस्सा चीन की कंपनियों को जाता है. अगर सरकार को वाकेई में चीन को आर्थिक झटका देना है तो इन कंपनियों पर भी बैन लगना चाहिए.

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