नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच लगातार चल रही बातचीत के बावजूद बॉर्डर पर तनाव कम नहीं हो रहा. दोनों की देश के जवान सरहद पर आमने-सामने हैं. भारत लगातार कोशिश कर रहा है कि बातचीत से समाधान निकाला जा सके लेकिन चीन बार-बार अपने वादे से मुकर जाता है. सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि चीनी सेना पूर्वी लद्दाख में सीमा गतिरोध को कम करने को लेकर गंभीर नहीं है. भारत चीन विवाद पर बारीक नजर रखे हुए विशेषज्ञों का कहना है कि चीन चाहता ही नहीं है कि सीमा पर विवाद खत्म हो सके. माना जा रहा है कि भारतीय सेना द्वारा जोरदार जवाब देने के कारण उसको अप्रत्याशित परिणाम का सामना करना पड़ रहा है.

सूत्रों ने कहा कि सैन्य वार्ता में गतिरोध उत्पन्न हो गया है। भारतीय सेना इस बात पर जोर दे रही थी कि तीन महीने से अधिक पुराने सीमा गतिरोध को सुलझाने के लिए के लिए चीनी पीएलए को इस साल अप्रैल की स्थिति बहाल करनी चाहिए लेकिन चीन ऐसा करने को तैयार नहीं है. भारतीय सेना ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शिफ्टिंग स्वीकार नहीं की जाएगी और भारत मजबूती से अपने बॉर्डर पर खड़ा है.

गुरुवार को दोनों देशों के वर्किंग मकैनिज्म फॉर कंसल्टेशन ऐंड को-ऑर्डिनेशन (यानी विचार-विमर्श और समन्वय तंत्र की 18वीं बैठक हुई. विदेश मंत्रालय के मुताबिक बैठक में दोनों पक्ष कंपलीट डिसइंगेजमेंट की दिशा में आगे बढ़ने पर फिर सहमत हुए. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों पक्ष WMCC की मीटिंग समेत बातचीत के मौजूदा तंत्र को जारी रखने पर सहमत हुए हैं. भारत और चीन ने पिछले ढाई महीने में कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ता की है लेकिन पूर्वी लद्दाख में सीमा रेखा के समाधान के लिए कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाया गया है, गुरुवार को, दोनों पक्षों ने राजनयिक वार्ता का एक और दौर आयोजित किया, जिसके बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल के अनुसार बकाया मुद्दों को हल करने के लिए सहमत हुए हैं.

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