सहारनपुर: भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर ‘रावण’ गुरुवार देर रात 2.30 बजे सहारनपुर स्थित जेल से रिहा कर दिया गया. चंद्रशेखर पर आरोप था कि वह 2017 में सहारनपुर में हुए जातीय दंगो में शामिल थे जिसके बाद उनपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाकर जेल में बंद कर दिया गया था. जिसके बाद कल रात जेल से आजाद होते ही राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए उनको आने वाले लोकसभा चुनाव में जड़ से उखाड़ फेंकने की बात कहते हुये कहा कि आने वाले 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराना है और इतना ही नहीं बीजेपी को सत्ता से ही नहीं बल्कि विपक्ष से भी बाहर कर देना है. चंद्रशेखर ने कहा, उनकी लड़ाई बीजेपी के गुंडो से हैं. और गंठबंधन सामाजिक हित में होना चाहिए. उन्होंने अपने उपर फिर से मामला दर्ज होने की आशंका जताते हुए कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि अगले 10 दिनों में वे (बीजेपी सरकार) मेरे खिलाफ दोबारा आरोप लगाएंगे.

चंद्रशेखर रावण को राज्य सरकार ने उनकी मां के अनुरोध और प्रशासन से मिली रिपोर्ट के आधार पर ही रिहा किया गया है. चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ को 2017 में सहारनपुर में हुए जातीय दंगों में शामिल होने के आरोप में उनके उपर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 (रासुका) के तहत मामला दर्ज करते हुए जेल में बंद कर दिया गया था. जिसमें वह पिछले 16 महीनों से बंद हैं.

इससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सराकर की तरफ से चंद्रशेखर को 1 नंबवर के दिन रिहा करने की बात कही गई थी लेकिन रिहाई का आदेश जारी होने के बाद ही उन्हे अगले दिन यानी 13 सितंबर की रात 2.30 बजे रिहा कर दिया गया गया और साथ ही उनके उपर लगाया गया रासुका कानून भी हटा दिया गया है.

बता दें की उत्तर प्रदेश में एक चर्चित नाम बन चुके चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ ने तीन साल पहले 2015 में भीम आर्मी का गठन किया था जो कुछ ही समय में सूबे की तमाम पिछड़ी जातियों के बीच काफी मशहूर हो गया था. इसमें रोचक बात है कि भीम आर्मी द्वारा 300 स्कूल भी संचालित किए जा रहे हैं जिसके बाद चंद्रशेखर उस वक्त लोगों की नजरों में आए थे जब उन्होंने सहारनपुर के चटमलपुर के पास स्थित घड़कोली गांव के एक बोर्ड पर लिखा था ‘घड़कोली वेलकम यू द ग्रेट चमार्स’.

जिसके बाद इस बोर्ड की फोटो मीडिया सोशल मीडिया सब जगह वायरल हो गई थी और इसके बाद ये मामला गर्मा गया था. बढ़ते विवाद के बीत पुलिस ने चंद्रशेखर पर 12 हजार का इनाम भी रखा था जिसके बाद एक गुप्त सूचना के आधार पर हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया था.

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