नई दिल्ली/ एक बार फिर श्रम मंत्रालय, उद्योगजगत के प्रतिनिधि और लेबर यूनियन से जुड़े लोगों के बीच नई श्रम कानून को लेकर चर्चा चल रही है. नए श्रम कानूनों के अंतर्गत कर्मचारियों के काम के घंटे, छुट्टियों, पेंशन, पीएफ, टेक होम सैलरी, रिटायरमेंट आदि के नियमों में बदलाव में हो सकते है. यह नए नियम 1 अप्रैल से लागू हो सकते है. हालांकि अभी नए नियमों के तहत कर्मचारियों की सालाना छुट्टियों की सीमा और संख्या पर भी अहम फैसला होना अभी बाकी है.

जानकारी के अनुसार पीएफ और अवकाश की सीमा बढ़ाने की मांग लेबर यूनियनों की तरफ से‌ उठाई गई है. इस पर फैसला होना अभी बाकी है. लेबर यूनियनों से जुड़े लोग चाहते है कि सालाना छुट्टियों की सीमा 240 से बढ़ाकर 300 दिन कर दी जानी चाहिए. सरकार के भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों, बीड़ी श्रमिकों, पत्रकारों और श्रव्य दृश्य श्रमिकों के साथ साथ सिनेमा क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों के लिए अलग नियम बनाए जाने की मांग की गई है.

ईपीएफ में भी कई नियम बदल सकते है. भारतीय मजदूर संघ ने मांग की है कि कर्मचारी राज्य बीमा योजना के समरूप कर्मचारी भविष्य ईपीएफ के अंतर्गत पात्रता मानदंड 15,000 रुपए महीना वेतन बढ़ाकर 21,000 रुपए किया जाना चाहिए.

बता दें कि ये सभी नए श्रम कानूनों को 1 अप्रैल से लागू होने है. संसद में श्रम सुधारों से जुड़े नए कानून 2020 में पास कर दिए गए थे. हालांकि अब केंद्र सरकार की कोशिश है कि ने श्रम कानूनों को इस साल अप्रैल से पहले यानि वित्तवर्ष में ही लागू कर दिया जाए. केंद्र सरकार की तरफ से इस बारे मे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी हितधारकों के साथ बैठक की गई. सभी मुद्दों का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है और इसके बाद जल्द ही नियमों को लागू कर दिया जाएगा.

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