तमिलनाडु, तमिलनाडु के कुन्नूर में सेना का हेलीकॉप्टर बुधवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हेलीकॉप्टर में CDS विपिन रावत, उनकी पत्नी समेत सेना के 14 शीर्ष अधिकारी सवार थे. इस हादसे में CDS विपिन रावत समेत 13 लोगों का निधन हो गया हैं. हेलीकॉप्टर क्रैश इतना भयानक था कि मौके पर 4 लोगों की मौत हो गई थी.स्थानीय लोगों की मदद से लोगों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया था. वहीँ इस घटना के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह CDS विपिन रावत के परिजनों के प्रति शोक जाहिर किया है और मुलाकत कर सांत्वना दी है.

CDS विपिन रावत ने साल 1978 मे सेना में एंट्री की थी, और उस दिन से उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। उन्होंने सेकेंड लेफ्टिनेंट के रूप में आर्मी में सफर शुरू किया और सीडीएस जनरल के रूप में सेवाएं वर्तमान में दे रहे थे. विपिन रावत ने सेना में 4 दशक से ज़्यादा का समय बिताया और इसी आधार पर उन्हें वीरता और अतिविशिष्‍ट पदको से सम्मानित किया गया था.

2016 में आर्मी चीफ बने थे विपिन रावत

सीडीएस बनाए जाने से पहले विपिन रावत ने साल 2016 में भारतीय सेना के जनरल दलबीर सिंह सुहाग की जगह लेते हुए 27वें सेनाध्यक्ष (सीओएएस) के रूप में भारतीय सेना की कमान संभाली थी.

विपिन रावत की ऐसी हुई थी सेना में ट्रेनिंग

विपिन रावत के पिता भी सेना में लेफ्टिनेंट थे और इसी से प्रेरित होकर विपिन रावत का सेना के प्रति प्रेम बड़ा था बिपिन रावत की पढ़ाई लिखाई शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल में हुई थी. विपिन रावत ने 1978 में ग्रेजुएशन कर स्वोर्ड ऑफ ऑनर हासिल किया। सेना में एंट्री करते ही विपिन रावत ने गोरखा राइफल्स की पांचवी बटालिन से अपना सैन्य सफर की शुरुआत की. 4 दशकों से तीनो सेना को एक साथ जोड़ कर चलने वाले CDS विपिन रावत के निधन से सेना को भारी क्षति पहुंची हैं.

सेना में शामिल होने से आर्मी चीफ तक का सफर

1-मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में वे जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड 2 रहे थे.

2- लॉजिस्टिक स्टाफ ऑफिसर, कर्नल मिलिट्री सेक्रेटरी, डिप्यूटी मिलिट्री सेक्रेटरी

3- जूनियर कमांड विंग में सीनियर इंस्ट्रक्टर

ऊंची चोटियों पर दुश्मन के इरादों को नाकाम करने में महारत

CDS विपिन रावत ने अपने इस 4 दशक के सफर में कई ऐसे ऑपरेशन को अंजाम दिया, जो सेना के लिए इतिहास बनकर सामने आए. पहाड़ो से संबंध रखने वाले विपिन रावत ने हिमांचल की ऊंची -ऊंची चोटियों पर ऐसे ऑपरेशन को सफल किया, जिन्हे सफल बनान सामान्य व्यक्ति की बात नहीं हैं. उन्हें अपने क्विक और रणनीतिक एक्शन के लिए सेना में जाना जाता था.

4 दशक के सफर में मिलें कई अवार्ड

1-बहादुरी के लिए कई सेवा मेडल और अवार्ड मिले हैं.
2 -यूनाइटेड नेशंस के साथ काम करते हुए भी उनको दो बार फोर्स कमांडक कमेंडेशऩ का अवार्ड दिया गया.

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