नई दिल्ली. कोरोना ने देश दुनिया की रफ्तार रोक सी दी है। हर एक चीज़ पर गहरा असर पड़ा है। बात करें भारत की तो दूसरी लहर में लाखों लोगों ने जान गंवा दी। दूसरी लहर में भारत ने भयंकर तबाही देखी। अब वैज्ञानिक तीसरी लहर की चेतावनी भी जारी कर चुके हैं। तीसरी लहर की जो सबसे भयानक बात का अंदेशा जताया गया है वो है मासूम बच्चों की सुरक्षा का। ये आशंका जताई गई कि तीसरी लहर में सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे बच्चे।

इन सभी आशंकाओं को देखते हुए पहले 10वीं और अब 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। जाहिर सी बात है मौजूदा समय में इसके अलावा कोई रास्ता भी नजर नहीं आता। खुद पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और सेहत सर्वोपरि है। ऐसे माहौल में बच्चों को तनाव देना उचित नहीं है। लेकिन परीक्षा रद्द हो जाने के बाद भी अभी सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं।

क्या होगा बच्चों का भविष्य

भले ही परीक्षाएं रद्द करके फौरी राहत मिल गई हो लेकिन बड़े स्तर पर देखें तो चुनौतियां बहुत हैं। किस तरह बच्चों को घर में रखकर उनका कैरियर खराब होने से बचाया जा सकता ये सबसे अहम सवाल है। सरकार को इसके बारे में सोचना होगा। 10वीं के छात्रों को प्रमोट करके 11वीं में भेज दिया गया। लेकिन 12वीं के बाद जो बच्चे अपने भविष्य की ओर पहला कदम बढ़ाते हैं वो अब किस रास्ते जाएंगे। किस तरह उनके आगे के दाखिले की प्रक्रिया होगी।

कब तक लगेगी बच्चों को वैक्सीन

तमाम बातों में एक बात ये भी निकलकर आई कि बच्चे वैक्सीन से दूर है इसलिए तीसरी लहर में उन्हें ज़्यादा खतरा है। जिसके बाद बच्चों और ट्रायल की मंजूरी दे दी गई। हालांकि ये मामला बस इतना ही आसान नहीं है। किसी भी ट्रायल में थोड़ा समय लगता है और ट्रायल हो जाने के बाद भी कितनी मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध होती है ये भी एक बड़ा सवाल है। क्योंकि राजधानी दिल्ली जैसे शहर को वैक्सीन की कमी की वजह से 18 से 44 साल के लोगों का टीकाकरण रोकना पड़ गया है। कई राज्य वैक्सीन की किल्लत से जूझ रहे।

ऑनलाइन क्लास कितनी असरदार

कोरोना संक्रमण के बाद ऑनलाइन क्लास ही बच्चों का एक सहारा बनकर सामने आया। इससे ज़रूर बच्चे घर पर ही पढ़ पा रहे हैं लेकिन इसमें भी चुनौतियां कम नहीं है। ऑनलाइन क्लास के लिए मोबाइल और डेटा पैक होना ज़रूरी है। ऐसे में शहरी बच्चों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों के बच्चों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वहीं इन सबके बीच अभिभावकों का शिक्षित न होना भी एक अहम वजह है। ऐसे में सवाल यही उठता है कि सरकार किस तरह ये सुनिश्चित करेगी कि सभी बच्चों को इस आपदा में समान शिक्षा मिल सके।

स्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि न तो बच्चों की सेहत से और न ही भविष्य से खिलवाड़ किया जा सकता है। दोनों ही सूरत में चूक का मतलब है बड़ा नुकसान। कई राज्यों ने अनलॉक की प्रक्रिया शुरू करके ढील दी देना शुरू कर दिया है। धीरे-धीरे दफ्तर भी खुलने लगेंगे। लेकिन बच्चों की सेहत को बिना नुकसान पहुंचाए शिक्षा देना बहुत बड़ी चुनौती है। ऐसा इसलिए क्यों बच्चों की इम्यूनिटी वयस्कों के मुकाबले बहुत कमजोर होती है और ऐसे में तीसरी लहर वाली आशंका के बीच कोई भी गलत कदम भारी तबाही ला सकता है।

ये ज़रूर है कि ऐसी स्थिति से दुनिया पहली बार दो-चार हुई है। लेकिन हर कदम फूंक-फूंककर रखने की जरूरत है। क्योंकि इस बेरहम वायरस का भयानक रूप हम सबने देखा है और हम में से कोई नहीं चाहेगा कि हमारे बच्चे इसका शिकार हों।

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