नई दिल्ली. संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा. जबकि नरेंद्र मोदी सरकार 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेगी. संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में इस बारे में फैसला हुआ. यह सत्र नरेंद्र मोदी सरकार के लिए बेहद अहम है क्योंकि शीतकालीन सत्र में जो बिल लटकेंगे, उन्हें बजट सत्र में पास कराने की कोशिश की जाएगी. फिलहाल राज्यसभा में तीन तलाक बिल और सवर्ण आरक्षण बिल लटका हुआ है. अगर मौजूदा विंटर सेशन में ये और अन्य बिल पास नहीं होते तो इन्हें बजट सेशल में लाया जाएगा. वहीं एक फरवरी को पेश होने वाले अंतरिम बजट में सरकार के पास जनता को ज्यादा से ज्यादा राहत देने की कोशिश रहेगी.

पिछले दिनों सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि मोदी सरकार फुल बजट पेश करने पर विचार कर रही है. सरकार को यकीन है कि वह 2019 के लोकसभा चुनावों में दोबारा सरकार बनाएगी. अब तक होता यह है कि चुनावी साल में मौजूदा सरकार अंतरिम बजट पेश करती है. बाद में नई सरकार फुल बजट पेश करती है. फरवरी 2014 में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने अंतरिम बजट पेश किया था. इसके बाद जुलाई में अरुण जेटली संसद में फुल बजट लाए थे.

कहा जा रहा है कि इस बार मोदी सरकार अंतरिम बजट में मध्यमवर्ग को राहत दे सकती है. इनकम टैक्स के जरिए नौकरीपेशा वर्ग को भी लुभाने की कोशिश की जाएगी. केंद्र सरकार बचत सीमा बढ़ाने, पेंशनभोगियों के लिए टैक्स छूट और होम होन पर रियायत देने पर विचार कर सकती है.

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