नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज वर्ष 2020-2021 के लिए आम बजट पेश किया. इस दौरान वित्त मंत्री ने जीएसटी की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि जीएसटी के लागू होने से टैक्स में कमी आई है और ज्यादातर जरूरी सामानों की कीमत कम हुई है. उन्होंने ये भी कहा कि हर परिवार की के घरेलू खर्च में 4 फीसद की बचत हुई है और इंस्पेक्टर राज का खात्मा हुआ है. वहीं वित्त मंत्री के बयान से उलट जीएसटी को लेकर वित्त आयोग के मुखिया एन के सिंह ने कहा था कि जीएसटी को नए तरीके से डिजाइन करना होगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि जीएसटी से 60 लाख नए करदाता जुड़े हैं लेकिन इससे सरकार की आय कितनी बढ़ी इस बारे में वित्त मंत्री ने कोई जानकारी नहीं दी. वित्त मंत्री ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को दोहराया. वित्त मंत्री ने कृषि बाजारों के उदारीकरण के लिए नए कानून की सिफारिश की लेकिन ये पहल तो साल 2014 में भी की गई थी जिसपर राज्य सरकारों ने कोई खास ध्यान नहीं दिया.

इसके अलावा वित्त मंत्री ने ग्रामीण विकास के लिए 1.23 लाख करोड़ रूपये आवंटित करने का एलान किया लेकिन उन्होंने ग्रामीण विकास किसी स्कीम का खास तौर पर जिक्र नहीं किया. उसी तरह खेती के लिए बिना किसी योजना का नाम लिए बिना 2.83 लाख करोड़ का समग्र आबंटन किए जाने का एलान किया.

शिक्षा को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नई शिक्षा नीति जल्द ही लाई जाएगी. साल 2014 के बजट में भी नई शिक्षा नीति का जिक्र किया गया था लेकिन ये नीति आज तक सरकारी फाइलों में ही अटकी हुई है. बजट भाषण के पहले 1.15 घंटे में ना तो रोजगार बढ़ाने और ना ही आय बढ़ाने को लेकर किसी तरह की स्कीम का जिक्र किया. बजट के पहले हिस्से में वित्त मंत्री ने मंदी से निपटने के लिए क्या रोडमैप है इसका कोई जिक्र नहीं किया.

पीएमसी बैंक घोटाले का असर वित्त मंत्री के बजट भाषण में नजर आया जहां वित्त मंत्री ने बैंक जमा पर बीमा एक लाख रुपये से पांच लाख रुपये कि‍या गया. इसका मतलब ये हुआ कि बैंक में रखी आपकी पांच लाख रूपये तक की राशि सुरक्षित होगी. यानी बैंक डूब भी गया तो आपके पांच लाख रूपये सुरक्षित होंगे. वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि बीमा की लागत बैंकों को ही उठानी होगी. ग्राहकों पर बीमा का बोझ नहीं पड़ेगा. वित्त मंत्री ने एलान किया कि पहले की तरह 5 लाख की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. 5- 7.5 लाख की आय पर 10%, 7.5 – 10 लाख पर 20% से 15%, 10 -12 लाख पर टैक्स 30% से 20%, 12.5 से 15 लाख पर 30 से 25 %, 15 लाख से ऊपर की आय पर 30% टैक्स लगेगा.

चरमराई हुई है भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से ये समय काफी कठिन है. जीडीपी 5 फीसदी पर आ गई है जो 11 साल में सबसे कम है. विदेशी निवेश यानी एफडीआई पिछले 17 सालों में सबसे कम है. मैनुफैक्चरिंग सेक्टर जहां बंपर रोजगार के अवसर होते हैं वो 15 सालों में सबसे निचले दर पर पहुंच गया है. सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स को कम करके निवेश और आय को बढ़ाने की कोशिश की लेकिन सरकार का ये फॉर्मूला भी फेल हो गया. अब सरकार के पास अर्थव्यवस्था को सुधारने का तरीका यही है कि वो आयकर को कम कर दे ताकि लोगों के हाथों में ज्यादा पैसे बचे जिसे वो खर्च कर सके साथ ही बचत कर सकें. ज्यादातर लोगों का मानना है कि सरकार को 6.25 लाख तक की आय करमुक्त होनी चाहिए.

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