नई दिल्ली: अक्सर आपने देखा होगा कि बजट दौरान बहुत से आंकड़ों के गणित से बोर हो जाते हैं और पूरा बजट भाषण नहीं सुनते हैं. ऐसा शायद इसलिए कि बहुत से लोगों को गणित और अर्थशास्त्र से इतना लगाव नहीं होता है या फिर इसलिए कि ये भाषण इतने लंबे कि इन्हें सुनते-सुनते बोरियत महसूस होने लगती है. यही वजह है कि अब वित्त मंत्री बजट भाषण के बीच-बीच में कविताएं पढ़ने लगे हैं या कुछ ऐसे चुटकुले कहने लगें हैं जिससे लोगों की बजट भाषण में दिलचस्पी बनी रहे.

पिछले साल यानी साल 2017 के बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कुछ ऐसा ही किया था. नोटबंदी को लेकर वित्त मंत्री ने कहा था ‘इस मोड़ पर घबराकर ना थम जाएं आप, जो बात नई है उसे अपनाएं आप, डरते हैं नई राह पर क्यों चलने से, हम आगे-आगे चलते हैं आ जाइए आप’

इसी भाषण में काले धन को सरकार की मुख्य प्राथमिकता करार देते हुए वित्त मंत्री ने कहा था कि ‘वेन माय एम इज राइट, वेन माय गोल इज इन साइट, द वाइंड्स फेवर मीं एंड आई फ्लाइ’ यानी अगर मेरा उद्देश्य सही है, अगर मेरा लक्ष्य साफ है तो हवाएं मेरा साथ देंगी और मैं उडूंगा.

बजट भाषण में कविताएं और शेर-ओ-शायरी की परंपरा काफी पुरानी है. साल 1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने बजट भाषण के दौरान इकबाल की शायरी पढ़ी थी. उन्होंने कहा था ‘यूनान-ओ-मिश्र, सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाकी नाम-ओ-निशान हमारा.’

बतौर वित्त मंत्री कई बार बजट पेश कर चुके कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम अपने बजट भाषण के दौरान कई बार तमिल कवि थिरुवल्लुवर की कविताएं शामिल कर चुके हैं. कविताओं के अलावा भी कई बार वित्त मंत्री अपने बजट भाषण में ह्यूमर का भी तड़का लगा चुके हैं. साल 2002 में एनडीए सरकार के तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने एंटरटेनमेंट जगत के बारे में कहा था ‘समय आ गया है कि हम एंटरटेनमेंट को और खुशी दें और उनके बचे हुए गम भी वापस ले लें’

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