श्रीनगर: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने मशहूर मेडिकल जर्नल द लेंसेट में   जम्मू-कश्मीर में धारा 370 खत्म होने को लेकर छपी रिपोर्ट का लिखित जवाब देते हुए कहा है कि ये भारत का आंतरिक मामला है और द लेंसेट का इस मामले पर कुछ भी कहने का कोई तुक नहीं बनता. द लेंसेट ने कश्मीरी लोगों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आजादी को लेकर लेख लिखा था जिसका आईएमएफ ने मुंहतोड़ जवाब दिया है. जर्नल ने शनिवार को अपने लेख में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने को विवादित कदम  बताते हुए कहा था कि इससे राज्य में स्वास्थ्य, सुरक्षा और कश्मीरियों की आजादी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जर्नल में कहा गया था कि पीएम मोदी ने कश्मीरियों के मन में विश्वास जगाने की कोशिश तो की है लेकिन पहले कश्मीरियों के मन से वो डर निकालने की जरूरत है जो उन्हें महसूस हो रहा है और सालों पुराने विवाद को सुलझाने की जरूरत थी ताकि भविष्य में इस कदम को लेकर कोई हिंसा ना हो. 

आईएमएफ ने जर्नल के एडिटर-इन-चीफ रिचर्ड हॉर्टन को चिट्ठी लिखकर कहा है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल राजनीतिक मामले में बिना किसी वजह से हस्तक्षेप कर रहा है. जम्मू-कश्मीर में जो भी कुछ हो रहा है वो भारत गणराज्य का अंदरुनी मामला है जिससे किसी दूसरे देश या व्यक्ति का कोई लेना देना नहीं है. कश्मीर का मुद्दा ऐसा है जिसे अंग्रेज पीछे छोड़ गए थे, ये भारत सरकार द्वारा उत्पन्न नहीं किया गया है. 

द लेंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक सालों से अस्थिर होने के बावजूद विकास के मापदंड बताते हैं कि कश्मीर में बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा विकास हुआ है. साल 2016 में देश के बाकी राज्यों के मुकाबले जम्मू-कश्मीर के लोगों के मुकाबले ज्यादा अच्छी सेहत रही. इसके अलावा द लेंसेट ने मेडिसीन सेंस फंटीयर्स की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि आधे से ज्यादा कश्मीरी मुश्किल से ही खुद को सुरक्षित पाते हैं जिन्होंने हिंसा में अपने घरवालों को खोया है. यही नहीं पांच में से हर एक आदमी ने अपनी आखों के सामने मौत देखी है. या यूं कह लें कि मौत के मुंह से बचकर वापस आया है. 

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