मुंबई: मराठा समाज के लोगों को शिक्षा और नौकरी में 16 फीसदी आरक्षण देने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई तमाम याचिकाओं पर बॉम्बे हाई कोर्ट फैसला सुनाएगा. पिछले साल 30 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा में ये बिल पास हुआ था जिसमें मराठा समाज से आने वाले लोगों को नौकरी और शिक्षा में 16 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था. हाई कोर्ट में सरकार के इस फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल की गई थी. वहीं कुछ लोगों ने आरक्षण के पक्ष में भी याचिका दाखिल की है.

गौरतलब है कि 6 फरवरी को जस्टिस रंजीत मोरे और जस्टिस भारती डांगरे की खंडपीठ ने इन सभी याचिकांओं पर सुनवाई पूरी कर ली थी और फिर अप्रैल में कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर मामले को फैसले के लिए रख लिया था. सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था लंबे समय से उपेक्षित रहे मराठा समाज को उठाने के लिए आरक्षण ही एकमात्र विकल्प है. याचिका में कहा गया है कि सरकार ने एक खास वर्ग को आरक्षण देकर समाज में एकता के ढांचे को खराब करने का काम किया है. उनका कहना है कि महाराष्ट्र सरकार के आर्थिक पिछड़ा वर्ग को लेकर बनाई गई रिपोर्ट के मुताबिक मराठा और कुनबी दोनों ही जातियां उतनी ही पिछड़ी हुई हैं और दोनों को ओबीसी कैटेगिरी में डाला जाना चाहिए.

देखना होगा कि बॉम्बे हाई कोर्ट मराठा आरक्षण के खिलाफ फैसला देता है या फिर उसके पक्ष में अपना फैसला सुनाता है क्योंकि मराठा आरक्षण की मांग काफी लंबे समय से चल रही है. इसको लेकर कई बार हिंसक प्रदर्शन भी हुए हैं लिहाजा देखना होगा कि क्या हाई कोर्ट सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए मराठा आरक्षण को जारी रखेगा या फिर इसे खत्म कर देगा. फिलहाल मराठा आरक्षण के खिलाफ और उसके पक्ष में बोलने वाले बहुत से लोग हैं. कुछ लोगों को सरकार का ये फैसला सही लगता है जबकि मराठा समाज के बाहर से आने वाले लोगों को लगता है कि ये फैसला सरासर गलत है और एक खास वर्ग को फायदा पहुंचाने वाला है. 

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