मुंबई: मुंबई के लोअर परेल के कमला मिल कंपाउंड के मोजोस लाउंज में बीती रात भीषण आग लग गई जिसमें 15 लोगों की जान चली गई. रात करीब 12:30 बजे दो रेस्टोरेंट में लगी आग देखते ही देखते इतनी विक्राल हो गई कि 14 लोगों की जिंदगियां लील गई. हादसे के बाद करीब तीन घंटों तक आग बुझाने का काम चलता रहा. बीएमसी के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और जैसा हर हादसे के बाद होता है, मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि प्रशासन हर बार हादसे के बाद ही कार्रवाई क्यों करता है? अगर बीएमसी पहले ही कमला मिल्स के स्ट्रक्चर पर मिली शिकायत पर कार्रवाई करता तो शायद आज वो हंसती खेलती 15 जिंदगियां आज जिंदा होती. जी हां, सामाजिक कार्यकर्ता मंगेश कालसकर के मुताबिक कमला मिल्स परिसर के स्ट्रक्चर को लेकर उन्होंने बीएमसी में कई बार शिकायत की लेकिन बीएमसी ने उन्हें पत्र लिखकर कहा कि परिसर में कोई गड़बड़ी नहीं है.

लेकिन आग लगी तो बीएमसी के सुरक्षा के दावे हवा हो गए. रेस्त्रां में आग बुझाने के यंत्र नहीं थे. फायर एक्जिट पर सामान रखा था जिसकी वजह से लोग वहां से निकल ही नहीं पाए. आग लगने पर सबसे पहले होटल का स्टाफ भागा जिसकी वजह से लोगों को पता ही नहीं चला कि आखिर निकलना कहां से है और देखते ही देखते 14 लोगों की दम घुटने से मौत हो गई. बीएमसी कमीश्नर मामले की जांच कर रहे हैं लेकिन सवाल बीएमसी पर भी खड़े होते हैं. बिना जांच पड़ताल के आखिर लगातार शिकायत के बावजूद बीएमसी ने रेस्त्रां को सिक्योरिटी क्लीन चिट कैसे दे दी? जिस अधिकारी की रिपोर्ट पर सिक्योरिटी क्लीन चिट दी गई क्या उसपर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?

ये पत्र बीएमसी ने उस शिकायकर्ता को लिखा था जिसमे कमला मिल कंपाउंड में बार/रेस्त्रां/ पब में अवैध निर्माण की शिकायत की थी. इस पत्र में बीएमसी ने लिखा था कि सब कुछ ठीक है कही कोई अवैध निर्माण नही हुआ है.
कमला मिल्स कंपाउंड अग्निकांड में जान गंवाने वाली खुशबू मेहता जो यहां अपने जन्मदिन का जश्न मनाने आईं थीं
खुशबू मेहता की दम घुटने की वजह से मौत हो गई

 

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