नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण के बाद से अचानक ही ब्लैक फंगस के मामलों में तेजी से उछाल आ गया है। ब्लैक फंगस के सैकड़ों मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं चक्रवाती तूफान ताउते और यास के बाद से कई जगहों पर खूब बारिश हुई है। जिसके बाद सब नमी बढ़ गई है। ऐसे में फंगस का खतरा और बढ़ जाता है।

दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया बताते हैं कि फंगस हवा में रहती है। यही आपको फफूंदी की शक्ल में ब्रेड पर और पेड़ के तनों पर काले रूप में दिखती है। ये फंगस आपकी नाक से होते हुए बलगम में मिलकर आपकी नाक की चमड़ी में चली जाती है। इसके बाद ये बीमारी बहुत तेजी से फैलती हुई सब कुछ खराब करते हुए दिमाग तक चली जाती है। इसमें मृत्यु दर 50 प्रतिशत है।

वहीं इस बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को हो जो कोरोना संक्रमण से रिकवर हो रहे हैं। ऐसे में ऑक्सीजन और मास्क लगाने में सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं हाई शुगर वालों के लिए भी इसका खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में चाहिए कि डाइबिटीज को नियंत्रण में रखा जाए।

कहां-कहां हो सकता है फंगस

बारिश के समय ये दीवारों पर नमी के तौर पर आ सकता है। फलों और सब्जियों में हो सकता है। फर्नीचर, कालीन या किसी ऐसी जगह जो जॉइंट हो। इन जगहों पर फंगस का होना आम बात है।

क्या करें

सबसे पहले तो फंगस की जांच दस्ताने, मास्क और चश्में के बगैर कतई न करें। काम हो जाने के बाद अच्छी तरह से इसे धोएं। अगर फंगस बहुत ज्यादा हो तो किसी एक्सपर्ट की मदद लें।

फर्नीचर को साफ करने के लिए केरोसीन का इस्तेमाल करें। लेकिन ध्यान रहे कि कपड़ा सूखा हो। वहीं कपड़ों की अलमारी में कपूर की गोली रखें। इससे अगर कपड़ों के जरिए नमी अंदर आती है तो ये उसे सोखने में मदद करती है।

कालीन हो सके तो बारिश में न बिछाएं। अगर बिछाते हैं तो सूखी रखने की कोशिश करें। वक़्त-वक़्त पर धूल-मिट्टी साफ़ करते रहें और धूप में सुखाते रहें।

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