नई दिल्ली. ब्लैक और व्हाइट फंगस के बाद अब येलो फंगस ने चिताएं बढ़ा दी हैं। येलो फंगस का यह मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आया है. गाजियाबाद के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर बीपी त्यागी का दावा है कि ब्लैक और व्हाइट फंगस के मुकाबले येलो फंगस कहीं ज्यादा खतरनाक है। ब्लैक फंगस का इलाज करने के लिए ओटी में सफाई चल रही थी, इसी दौरान जांच में पता चला कि मरीज येलो फंगस से भी संक्रमित हैं। फिलहाल मरीज की हालत में सुधार है।

क्या है येलो फंगस

येलो फंगस एक घातक बीमारी है क्योंकि यह आंतरिक रूप से शुरू होता है। सुस्ती, कम भूख लगना, या बिल्कुल भी भूख न लगना और वजन कम होना येलो फंगस के शुरुआती लक्षण हैं. येलो फंगस के फैलने से मरीज़ का पाचन तंत्र बिगड़ सकता है। जैसे-जैसे यह बीमारी बढ़ती है, वैसे-वैसे अधिक गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें मवाद का रिसाव और खुले घाव का धीमी गति से ठीक होना, या सभी घावों का धीमी गति से भरना जैसे लक्षण शामिल हैं। कुपोषण, ऑर्गन फेलियर और नेक्रोसिस के कारण धंसी हुई आंखें इस फंगस के अति गंभीर लक्षणों में गिने जाते हैं।

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