नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने कालेधन और शैल कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए फ्रॉड कंपनी के निदेशकों के डिन (Director Identification
Number)को फ्रीज करने का निर्णय लिया है. दरअसल देश की करीब 33 लाख सक्रीय कंपनी के निदेशकों को सरकार ने केवाईसी kyc (Know your customer) के नियमों का पालन अनिवार्य कर दिया है. अगर ऐसे में कंपनिया केवाईसी के नियमों का पालन नहीं करती हैं तो निदेशकों का डिन नंबर फ्रीज किया जाएगा.

गौरतलब है कि वाईसी नियमों की औपचारिकता को पूरी करने के लिए मिनिस्टरी ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स ने सभी कंपनियों को 15 सिंतबर तक का समय दिया था. ऐसे में सिर्फ 12 लाख कंपनी यानी सिर्फ 35 फीसदी निदेशकों ने केवाईसी नियमों का पालन किया है. दूसरी ओर मिनिस्टरी इसकी डेडलाइन को बढ़ाने का कोई विचार नहीं कर रही है. सरकार केवाईसी के नियमों में की गई सख्ताई के जरिए घरेलू कामकाजी महिला, ड्राइवर और ऐसे ही दूसरों लोगों को गलत तरीके से कंपनी के निदेशक बनाने के गोरखधंधे पर रोक लगाना है.

ऐसे में अगर कोई मिनिस्टरी ऑफ कॉरपोरेट इन निर्देशों का पालन नहीं करने पर डिन नंबर सीज करने की कार्रवाई कर सकता है. हालांकि इन मामलों में आयोग्य करार दिए गए कंपनी के निदेशक केवाईसी के सभी नियमों का पालन और 5 हजार रुपए रजिस्ट्रेशन फीस देकर फिर से निदेशक बन सकते हैं. वहीं जिन 3 लाख कंपनियों ने आईटीआर दाखिल नहीं की है उन्हें सरकार डिरजिस्टर्ड करने का विचार कर रही है. इसके साथ ही 3 लाख कंपनियों के निदेशकों को आयोग्य ठहराया जाता है. सरकार का इस बारे में कहना है कि शैल कंपनियां और फर्जी निदेशक काला धन कमाने के बड़े जरिया हैं.

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