मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी कि जापानी दिमागी बुखार से अब तक 65 बच्चों की मौत हो चुकी है. 10 साल से कम उम्र के इन बच्चों को इन्सेफेलाइटिस के लक्षण मिलने के बाद मुजफ्फरपुर के दो अस्पतालों में भर्ती कराया गया था. वहीं राज्य सरकार ने इन मौतों की वजह जापानी बुखार नहीं बताया है. राज्य सरकार के मुताबिक इन बच्चों की मौत हाइपोग्लाइसीमिया की वजह से हुई है. हाइपोग्लाइसीमिया का अर्थ होता है शरीर में ब्लड शुगर लेवल की कमी होना. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाइपोग्लाइसीमिया एईएस का ही एक पहलू है. इस मामले में केंद्र की ओर से सात सदस्यीय टीम गठित की गई है जो ऐसे अस्पतालों का जल्द निरीक्षण करेगी और इस संबंध में गाइडलाइन्स जारी करेगी.

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने इस मामले पर चिंता जताई है. सीएम नितीश कुमार ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश जारी किए हैं. आपको बता दें कि इस साल जनवरी से अब तक 10 साल से कम उम्र वाले 172 बच्चों को एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम के लक्षण के साथ दो अस्पतालों में भर्ती कराया गया था. इनमें से 157 बच्चे 1 जून तक भर्ती कराए गए हैं और जो 43 बच्चों की मौत हुई हैं वे सब जून की ही हैं.

श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH)में जनवरी के बाद से 117 मरीजों को भर्ती कराया गया था. इनमें से 102 बच्चों को जून में भर्ती कराया गया था, जिनमें 36 बच्चों की मौत हो चुकी है. केजरीवाल मातृसदन में 55 AES मरीजों को 1 जून के बाद भर्ती कराया गया और उनमें से 7 बच्चों की मौत हो चुकी है. फिलहाल 4 बच्चे केजरीवाल मातृसदन और 6 बच्चे SKMCH में गंभीर हालत में भर्ती हैं. एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम को बिहार में चमकी बुखार भी कहा जाता है. 

बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी संजय कुमार ने कहा है कि हमे आशा है कि केंद्र की टीम से कुछ गाइडलाइन्स जारी की जाएंगी. इनमें से ज्यादातर मौत हाइपोग्लाइसीमिया की वजह से हुई हैं. एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम के जो मरीज भर्ती कारए गए हैं वे लोग सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली और पूर्वा चंपारण के रहने वाले हैं.

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