इतना भी गुमान न कर आपनी जीत पर ” ऐ बेखबर ” शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं।…. बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर कोई शेर सबसे सटीक बैठता है तो वो यही क्योंकि नीतीश कुमार की जीत से ज्यादा चर्चा तेजस्वी यादव और महागठबंधन की हार का है. भले ही नीतीश कुमार चुनाव जीत गए हों लेकिन 31 साल के तेजस्वी यादव ने जिस तरह अकेले मोर्चा संभालते हुए महागठबंधन को 112 सीटों पर लाकर रख दिया उसकी तारीफ हो रही है. बिहार विधानसभा चुनावों में एक तरफ तेजस्वी यादव और दूसरी तरफ एक से बढ़कर एक राजनीति के महारथियों की फौज. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां. केंद्रीय मंत्रियों का प्रचार तंत्र और दूसरी तरफ तेजस्वी जिन्होंने एक दिन में 17-17 रैलियों को संबोधित किया. यही वजह रही कि आरजेडी बिहार में 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी वहीं बीजेपी पूरा दमखम लगाकर भी 74 सीट ही जीत पाई.

नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू सिर्फ 43 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकती. सबसे बुरी स्थिति कांग्रेस की रही जो सिर्फ 19 सीटों पर ही सिमटकर रह गई. भाकपा माले 12 और अन्य के खाते में 8 सीटें गई. चुनाव परिणाम सामने आने के बाद से कांग्रेस की भी चर्चा है जो थोड़ा भी बेहतर प्रदर्शन करती तो बिहार में महागठबंधन की सरकार बन सकती थी. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के भी पांच विधायक जीतकर आए हैं.

बहरहाल राजनीति में जैसा नीतीश कुमार कहते थे अंत भला तो सब भला तो कुछ वैसा ही उनके लिए हुआ है. अंत भला रहा जिसके चलते नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. खबर है कि दिवाली बाद नीतीश कुमार का शपथग्रहण समारोह हो सकता है. दूसरी तरफ बीजेपी के दिल्ली दफ्तर में आज शाम पीएम मोदी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. बताया जा रहा है कि बिहार चुनाव की जीत का जश्न भी पार्टी दफ्तर में मनाया जाएगा साथ ही बंगाल चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा होगी.

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