पटना: बिहार में हर रोज हो चल रहे सियासी उठापटक के बीच गुरुवार को हिंदुस्तान आवामी मोर्चा के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने खुद को महागठबंधन से अलग करने का एलान कर दिया. मांझी की पार्टी की कोर कमेटी ने फैसला लिया है कि वह अब महागठबंधन का हिस्सा नहीं रहेंगे. माना जा रहा है कि जीतन राम मांझी जेडीयू के साथ जा सकते हैं. बताया जा रहा है कि जीतनराम मांझी की घर वापसी को लेकर जेडीयू की तरफ से पिछले कई महीनों से कवायद हो रही है. जेडीयू चाहती है कि मांझी की पार्टी हम का पूरी तरह से जेडीयू में विलय हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं होने की सूरत में मांझी की पार्टी के साथ कुछ सीटों पर समझौते का फॉर्मूला तय किया जा रहा है.

हालांकि अभी तक तय नहीं हुआ है कि जीतनराम मांझी की पार्टी जेडीयू से हाथ मिलाएगी या नहीं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जेडीयू और मांझी के बीच डील हो चुकी है और जल्द ही औपचारिक एलान भी हो जाएगा. गौरतलब है कि आज ही लालू यादव के समधि चंद्रिका राय भी दो विधायकों के साथ आरजेडी में शामिल हुए हैं. वहीं नीतीश सरकार में पूर्व मंत्री श्याम रजक पिछले दिनों जेडीयू छोड़कर आरजेडी में आए थे. इस दौरान श्याम रजक ने नीतीश सरकार दलित विरोधी कहा था. उन्होंने कहा था कि बिहार का कोई ऐसा थाना नहीं है जहां दलितों के साथ हत्या, बलात्कार और छेड़खानी नहीं होती.

नीतीश कुमार के खिलाफ श्याम रजक के बयान पर जीतनराम मंझी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि श्याम रजक मंत्रिमंडल में इतने दिनों तक लाभ लेने के बाद चुनाव के समय में नीतीश कुमार को दलित विरोधी कह रहें हैं, जिसे उचित नहीं ठहराया जा सकता है. मांझी के इस बयान को तभी से उनके घर वापसी से जोड़कर देखा जा रहा था.

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