नई दिल्ली। गेहूं की बढ़ती कीमत को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसके निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. आपको बता दें कि ताजा सरकारी आदेश में गेहूं को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है. भारत सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक देश से बाहर जाने वाले गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी गई है।

‘ताकि आपकी थाली से रोटी गायब न हो’

डीजीएफटी ने कहा, ‘गेहूं की निर्यात नीति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाती है. विभागीय आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत सरकार अपने नागरिकों को खाद्य सुरक्षा मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है. वहीं, पड़ोसी और मित्र देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए और उनकी सरकारों के अनुरोध के आधार पर अब केवल कुछ स्थितियों में ही गेहूं के निर्यात की अनुमति दी जाएगी. रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण गेहूं की वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान के मद्देनजर निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है. आपको बता दें कि रूस और यूक्रेन दोनों ही गेहूं के प्रमुख निर्यातक रहे हैं।

बता दें कि यह फैसला इसलिए भी लिया गया है ताकि आज की वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की जा सके. यानी आपकी थाली से रोटी गायब न हो इसके लिए सरकार ने खास इंतजाम किए हैं।

क्या कहते हैं आंकड़े?

इस सप्ताह जारी आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि ईंधन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में आठ साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. मजबूत वैश्विक मांग के कारण 2021-22 में भारत का गेहूं निर्यात बढ़कर 70 लाख टन या 2.05 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया. डीजीएफटी के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में गेहूं के कुल निर्यात में से करीब 50 फीसदी खेप बांग्लादेश भेजी गई. देश ने इस साल लगभग 9,63,000 टन गेहूं का निर्यात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 1,30,000 टन गेहूं का निर्यात किया गया था. भारत सरकार को चालू वित्त वर्ष (2022-23) में एक करोड़ टन गेहूं का निर्यात करने की उम्मीद थी. वाणिज्य मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि भारत गेहूं निर्यात खेप को बढ़ावा देने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए नौ देशों- मोरक्को, ट्यूनीशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, वियतनाम, तुर्की, अल्जीरिया और लेबनान में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भेजेगा।

निजी व्यापारियों द्वारा भारी उठान और पंजाब-हरियाणा में कम आवक के कारण 1 मई तक चालू रबी विपणन सत्र में भारत की गेहूं खरीद भी 44 प्रतिशत घटकर 1.62 लाख टन रह गई है. सरकार ने एक साल पहले की अवधि में 2.88 लाख टन गेहूं की खरीद की थी. रबी का विपणन सीजन अप्रैल से मार्च तक चलता है. निर्यात के लिए खाद्यान्न की बढ़ती मांग के बीच निजी कंपनियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक कीमत पर गेहूं खरीदा है. केंद्र ने विपणन वर्ष 2022-23 में रिकॉर्ड 4.44 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा है, जबकि पिछले विपणन वर्ष में यह 4.33 लाख टन था।

कृषि मंत्रालय की घोषणा

केंद्र ने केंद्रीय पूल के लिए कम खरीद के बीच थोक उपभोक्ताओं को मुफ्त बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की बिक्री रोक दी है और उनसे अनाज खरीदने के लिए योजना शुरू होने का इंतजार नहीं करने को कहा है. कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) में गेहूं का रिकॉर्ड 11.13 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है।

प्याज पर ऑर्डर

एक अलग अधिसूचना में, DGFT ने प्याज के बीज के लिए निर्यात शर्तों को आसान बनाने की घोषणा की है. डीजीएफटी ने कहा, ‘प्याज के बीज की निर्यात नीति को तत्काल प्रभाव से सीमित श्रेणी में रखा गया है. इससे पहले प्याज के बीज का निर्यात प्रतिबंधित था।

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