नई दिल्ली। देश में महंगाई दर बढ़ती जा रही है। केंद्रीय बैंक भी इसको लेकर चिंतित है और नियंत्रण के लिए कदम उठा रही है। हाल ही में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की थी। जून में दरों में फिर से बढ़ोतरी की उम्मीद है क्योंकि खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में सालाना आधार पर आठ साल के उच्च स्तर 7.79 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। इस बीच एक सामाचार एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे भारत की मुद्रास्फीति बढ़ रही है, सस्ते एकल-सेवा वाले पैकेट जैसे साबुन और कुकीज़ हल्के होते जा रहे हैं( वजन कम करना) जबकि कीमत नहीं बढ़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां कम आमदनी वाले और ग्रामीण इलाकों में लोकप्रिय फिक्स्ड प्राइस आइटम्स का वजन घटाकर ज्यादा इनपुट प्राइस से निपटने की योजना अपना रही हैं।

कंपनियों ने अपनाया ये तरीका

रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य तेलों, अनाज और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच यूनिलीवर की भारतीय शाखा, घरेलू उपभोक्ता सामान फर्म ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड और डाबर इंडिया लिमिटेड सहित कंपनियां सस्ते पैकेजों को हल्का करने की ओर बढ़ गई हैं। भारत के लिए यह कोई नई बात नहीं है। सबवे रेस्तरां और डोमिनोज पिज्जा सहित कई खाद्य कंपनियों ने लागत में कटौती के लिए अमेरिका में अपने उत्पादों की मात्रा कम करके इसी तरह के कदम उठाए हैं। यह रणनीति भारत में अपनाई जा रही है। जब भारतीय उपभोक्ता कीमतें पिछले चार महीनों में केंद्रीय बैंक के 6 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर चली गई हैं।

हिंदुस्तान यूनिलीवर ने कही ये बात

हिंदुस्तान यूनिलीवर के मुख्य वित्तीय अधिकारी रितेश तिवारी ने हाल ही में कहा, “हम अगली दो से तीन तिमाहियों में और अधिक मुद्रास्फीति देखेंगे।” उन्होंने कहा था कि फिक्स्ड प्राइस पैकेज में वॉल्यूम कम करना ही कीमतों में बढ़ोतरी को अवशोषित करने का एकमात्र तरीका है। आपको बता दें कि हिंदुस्तान यूनिलीवर का भारत में बहुत बड़ा बाजार है और इसके उत्पादों का उपयोग बड़ी मात्रा में किया जाता है।

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