नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट आज  पांच एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी पर होने वाली सुनवाई  एक बार फिर टल गई है अब ये सुनवाई 17 सितंबर को होगी जिसमें इन एक्टिविस्टों को पिछले महीने पुणे पुलिस ने माओवादियों से साथ संबंध रखने और भीमा कोरेगांव हिंसा में कथित भागीदारी के आरोप में हिरासत में लिया था. सीजेआई दीपीक मिक्षा की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. जिसमें सुप्रीम कोर्ट इस बात का फैसला करेगी कि गिरफ्तार किए गए पांच एक्टिविस्ट कवि वरवरा राव, अरुण पेरेरा, गौतम नवलखा, वेरनोन गोन्जाल्विस और सुधा भारद्वाज की हाउस अरेस्ट की मियाद बढ़ाई जाए या उनको पुलिस हिरासत में भेजा जाए.

इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए पुणे पुलिस को मुंबई हाई कोर्ट से फटकार मिली थी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी पुणे पुलिस को लताड़ लगाई थी. इस मामले में पुणे पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देखा चाहिए. पुणे पुलिस के इस बयान से नराज हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि पुणे पुलिस कैसे कह सकती है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए.

इस मामले में महाराष्ट्र सरकार की का कहना है कि जिन एक्टिविस्ट को गिरफ्तार किया गया है उनके बदले किसी और को याचिका दायर करने का हक देना ठीक नहीं है. इस मामले की महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे वकील तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि कल ऐसा होगा कि जब किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाएगा तो उसके धर्म और समुदाय के लोग उसके सपोर्ट में याचिका दाखल कर उसके लिए राहत मांगेंगे.

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया था जिसमें बताया गया था कि जिन पांचो एक्टिविस्ट को गिरफ्तार किया गया है वह पांचों समाज में अराजकता फैलाने की योजना बना रहे थे. जिसके सूबत पुलिस के पास हैं. सरकार ने इस हलफनामें में यह भी कहा कि इन पांचों को अलग अलग वजहों से गिरफ्तार नहीं किया गया उनको इसलिए गिरफ्तार किया गया है क्योंकि पुलिस के पास इनके खिलाफ काफी सबूत हैं.

राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामें में यह बात भी कही गई थी कि इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि गिरफ्तार किए गए पांचो एख्टिविस्ट (माओवादी) प्रतिबंधित आतंकी संगठन के सदस्य हैं. यह लोग देश में हिंसा फैलाने की योजना बना रहे थे इसके अलावा इन लोगों ने पूरे देश में बड़े स्तर पर आगजनी और तोड़फोड़ करने की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं. ताकि समाज में अराजकता का माहौल बन सके.

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